फंड जुटाने का मकसद और मार्केट की हकीकत
कंपनी यह $2 मिलियन (लगभग ₹16.6 करोड़) की नई पूंजी अपने ऑफलाइन डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने, मार्केटिंग पर जोर देने और ओमनीचैनल (omnichannel) उपस्थिति का विस्तार करने के लिए इस्तेमाल करेगी। JM Financial Private Equity, जो पहले भी August 2024 में ₹40 करोड़ ($4.8 मिलियन) की सीरीज A राउंड का नेतृत्व कर चुकी है, इस बार भी कंपनी में निवेश करने वाली एक रिपीट इन्वेस्टर (repeat investor) है।
भारत का मसाला बाजार काफी बड़ा है, जिसका अनुमान $7.19 बिलियन (2025) से बढ़कर 2032 तक $10.74 बिलियन होने की उम्मीद है। लेकिन, यह सेक्टर बहुत ज्यादा फ्रेग्मेंटेड (fragmented) है। ऑर्गेनाइज्ड (organized) प्लेयर्स की तुलना में अनऑर्गेनाइज्ड (unorganized) सेगमेंट की हिस्सेदारी 60-70% है। Everest, जिसका सालाना रेवेन्यू ₹3,850 करोड़ है, और MDH जैसे बड़े प्लेयर्स का मार्केट में मजबूत दबदबा है। Zoff Foods, जिसका FY25 में रेवेन्यू ₹103 करोड़ था, इस कॉम्पिटिटिव (competitive) माहौल में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है।
प्रॉफिटेबिलिटी पर बड़ा सवाल, घाटा बढ़ा
FY25 में Zoff Foods का रेवेन्यू 11% बढ़कर ₹103 करोड़ हो गया, लेकिन कंपनी को ₹17 करोड़ का नेट लॉस हुआ। यह पिछले साल के ₹20 लाख के लॉस से काफी ज्यादा है। कंपनी के कुल एक्सपेंसेस (expenses) 32% बढ़कर ₹120 करोड़ हो गए। इसका एक बड़ा कारण एडवरटाइजिंग (advertising) पर किया गया खर्च है, जो तीन गुना होकर ₹12 करोड़ तक पहुंच गया। यह तेजी से पैसा खर्च करने की स्ट्रैटेजी (strategy) को दिखाता है।
आगे की राह और चुनौतियां
Zoff Foods अब जनरल ट्रेड, मॉडर्न रिटेल और ऑनलाइन चैनलों पर अपनी पहुंच बढ़ाने की योजना बना रही है। कंपनी अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो (portfolio) को भी बढ़ाने पर विचार कर सकती है। हालांकि, असली चुनौती यह है कि कंपनी किस तरह अपने बढ़ते खर्चों को कंट्रोल करते हुए, कड़े कॉम्पिटिशन के बीच रेवेन्यू ग्रोथ को सस्टेनेबल प्रॉफिट (sustainable profit) में बदल पाएगी।