Zivame की ज़मीनी तैयारी: छोटे शहरों में 'ब्रांड' की दस्तक
Reliance Retail की बैटिंग वाली Lingerie कंपनी Zivame अब भारत के छोटे शहरों, यानी टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपना कारोबार ज़ोर-शोर से फैलाने की फिराक में है। कंपनी की योजना है कि अगले एक साल के अंदर इन शहरों में 60 से 80 नए फ्रेंचाइजी मॉडल पर आधारित स्टोर खोले जाएं। ये कदम सीधे तौर पर इन उभरते बाज़ारों में बढ़ती कंज्यूमर डिमांड का फायदा उठाने के लिए उठाए जा रहे हैं।
Profitability का दावा, पर क्या है हकीकत?
इस बड़ी विस्तार योजना के साथ-साथ Zivame ने यह भी दावा किया है कि उसने पिछली तिमाही में Profitability (मुनाफे) में वापसी की है। यह कंपनी के लिए एक काफी अहम घोषणा है, खासकर तब, जब पिछले फाइनेंशियल ईयर 2024 में कंपनी को नुकसान (Losses) की खबरें आई थीं। Zivame ने 31 मार्च 2025 तक ₹166 करोड़ का सालाना रेवेन्यू दर्ज किया है। हालांकि, lingerie जैसे लो-मार्जिन (Low-margin) और फ्रैग्मेंटेड (Fragmented) मार्केट में लगातार प्रॉफिट बनाए रखना एक बड़ी चुनौती रही है।
Reliance Retail ने 2020 में Zivame में $160 मिलियन का निवेश करके एक बड़ा स्टेक (Stake) खरीदा था, जिससे कंपनी को पूंजी (Capital) तो मिली है, लेकिन Profitably स्केल करने की चुनौती अभी भी बनी हुई है।
फ्रेंचाइजी मॉडल: तेज़ी का रास्ता या कंट्रोल का रिस्क?
फ्रेंचाइजी मॉडल Zivame को कम कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) के साथ तेज़ी से विस्तार करने का मौका देगा। भारत में फ्रेंचाइजी बिज़नेस का सक्सेस रेट (Success Rate) आम तौर पर अच्छा माना जाता है। लेकिन, इस मॉडल में सबसे बड़ी चुनौती ब्रांड की कंसिस्टेंसी (Consistency) और कस्टमर एक्सपीरियंस (Customer Experience) को हर जगह एक जैसा बनाए रखना है, जो Lingerie जैसे सेंसिटिव सेगमेंट में बेहद अहम है।
सिर्फ इनरवियर नहीं, बच्चों के कपड़े और विदेश का भी प्लान
Zivame सिर्फ इनरवियर तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी Kidswear (बच्चों के कपड़ों) जैसे नए सेगमेंट में उतरने की संभावना भी तलाश रही है। साथ ही, कंपनी Southeast Asia जैसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी अपनी संभावनाएं खंगाल रही है। Southeast Asia का ई-कॉमर्स मार्केट 2034 तक $1.48 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो इसे एक आकर्षक बाज़ार बनाता है।
मार्केट की चाल और आगे की राह
भारत का अपैरल (Apparel) मार्केट 2029-30 तक $176 बिलियन का होने का अनुमान है, और इसमें छोटे शहरों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। सोशल मीडिया मार्केटिंग (Social Media Marketing) और डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स (Digital Influencers) का रोल कंज्यूमर बिहेवियर को बनाने में काफी बढ़ गया है।
हालांकि, Zivame के सामने एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) एक बड़ा कंसर्न है। फ्रेंचाइजी स्टोर्स में क्वालिटी कंट्रोल और ब्रांड वैल्यू को बनाए रखना आसान नहीं होगा। साथ ही, नए सेगमेंट में विस्तार कंपनी के मुख्य बिज़नेस से फोकस हटा सकता है। Reliance का सपोर्ट बड़े पैमाने पर विस्तार में मदद करेगा, लेकिन Zivame को Profitability और ब्रांड पोजीशनिंग दोनों पर खास ध्यान देना होगा।