क्विक-कॉमर्स कंपनी Zepto ने ग्राहकों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ने और लॉयल्टी बढ़ाने के लिए ₹99 प्रति माह का 'Zepto Club' सब्सक्रिप्शन प्रोग्राम लॉन्च किया है। यह कदम कंपनी के ₹7,000 करोड़ के IPO की तैयारी के बीच आया है। कैशबैक और प्रायोरिटी सेवाओं की पेशकश करके, Zepto का लक्ष्य अत्यधिक प्रतिस्पर्धी सेक्टर में मार्जिन और ग्राहक बनाए रखने में सुधार करना है।
IPO से पहले 'Zepto Club' से वैल्यू बढ़ाने की रणनीति
Zepto ने अपने नियोजित पब्लिक मार्केट डेब्यू से पहले एक स्थिर और लाभदायक ग्राहक आधार बनाने के लिए अपनी पेड लॉयल्टी प्रोग्राम 'Zepto Club' को लॉन्च किया है। ₹99 प्रति माह की कीमत वाले इस सब्सक्रिप्शन में ग्राहकों को Z-Coins के जरिए 5% कैशबैक और ₹99 से ऊपर के ऑर्डर पर अनलिमिटेड फ्री डिलीवरी जैसे फायदे मिलेंगे। साथ ही, यह सर्विस प्रायोरिटी पैकिंग और डेडिकेटेड कस्टमर सपोर्ट का भी वादा करती है, जिसका मकसद हाई-फ्रीक्वेंसी यूजर्स को प्लेटफॉर्म पर बनाए रखना है।
यह लॉन्च Zepto की IPO-पूर्व रणनीति का एक अहम हिस्सा है, क्योंकि कंपनी संभावित निवेशकों को बेहतर यूनिट इकोनॉमिक्स और ग्राहक जुड़ाव (customer stickiness) दिखाने की कोशिश कर रही है। Zepto पहले ही ₹7,000 करोड़ के इश्यू के लिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल कर चुकी है। लॉयल्टी स्ट्रक्चर के माध्यम से बार-बार होने वाले ट्रांजैक्शन को प्रोत्साहित करके, Zepto अपने ग्राहकों के लाइफटाइम वैल्यू को बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
'Select' वर्टिकल और प्रीमियम ग्रोथ
क्विक-कॉमर्स का क्षेत्र तेजी से डिलीवरी और प्रोडक्ट वैरायटी के लिए एक बैटलग्राउंड बन गया है। Zepto का पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल में आना, Swiggy One जैसे स्थापित प्रोग्राम्स के साथ सीधे मुकाबले में खड़ा करता है। क्लब मेंबरशिप के अलावा, Zepto अपने 'Select' वर्टिकल का भी विस्तार करने की योजना बना रही है, जो गॉरमेट और इम्पोर्टेड ग्रॉसरी पर केंद्रित है। उच्च-मूल्य वाले उत्पादों में यह विस्तार, Blinkit और BigBasket जैसी कंपनियों द्वारा अपनाई गई रणनीतियों के समान, प्रीमियम कंजम्पशन मार्केट में एक बड़ा हिस्सा हासिल करने का एक स्पष्ट प्रयास है।
मार्केट डायनामिक्स और जोखिम
प्रीमियम सामान और लॉयल्टी प्रोग्राम्स में विस्तार से रेवेन्यू बढ़ सकता है, लेकिन क्विक-कॉमर्स सेक्टर लगातार चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस क्षेत्र में प्रॉफिटेबिलिटी काफी हद तक ऑपरेशंस को स्केल करते हुए कुशल डिलीवरी लागत बनाए रखने पर निर्भर करती है। ग्राहक अधिग्रहण (customer acquisition) और लॉयल्टी प्रोग्राम्स पर बढ़ा हुआ खर्च प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। इसके अतिरिक्त, कंपनी को गॉरमेट और इम्पोर्टेड आइटम्स जैसी अधिक जटिल इन्वेंटरी को अपनी उत्पाद सूची में जोड़ते समय तेज डिलीवरी समय बनाए रखने से जुड़े ऑपरेशनल जोखिमों का प्रबंधन करना होगा।
निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि यह मेंबरशिप प्रोग्राम कैजुअल खरीदारों को लॉयल, फ्रीक्वेंट बायर्स में कितनी प्रभावी ढंग से बदल पाता है। इन पहलों की सफलता, साथ ही आगामी विस्तार के दौरान लागतों को प्रबंधित करने की कंपनी की क्षमता, IPO प्रक्रिया के दौरान इसके समग्र बिजनेस नैरेटिव के लिए महत्वपूर्ण कारक होंगे। अगला महत्वपूर्ण डेवलपमेंट SEBI से अंतिम मंजूरी और पब्लिक इश्यू लॉन्च की संभावित टाइमलाइन होगी।
