DSM Fresh Foods, जो Zappfresh ब्रांड को चलाती है, ने अपने प्रोडक्ट रेंज का विस्तार करने और अधिग्रहण (acquisitions) पर जोर देना शुरू कर दिया है। हाल ही में 'मीवा फूड्स' (Meevaa Foods) की लॉन्चिंग और 'एवियोम फूडटेक' (Avyom Foodtech) के जरिए बिजनेस हासिल करने के प्रयास, कंपनी की उस स्ट्रैटजी का हिस्सा हैं, जिसके तहत वे अपने मुख्य फ्रेश मीट बिजनेस से आगे बढ़कर ज्यादा मार्जिन वाले सेगमेंट में पैठ बनाना चाहते हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत का फूड इंडस्ट्री कन्वीनियंस-फोक्स्ड प्रोडक्ट्स में ज़बरदस्त ग्रोथ देख रहा है।
कंपनी के पहली छमाही, फाइनेंशियल ईयर 2026 (H1 FY26) के नतीजों के मुताबिक, कंपनी ने ₹95.85 करोड़ का रेवेन्यू और ₹7.03 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले बेहतर है। इस परफॉर्मेंस ने कंपनी के डायवर्सिफिकेशन (diversification) के लक्ष्यों को बल दिया है। हालांकि, IPO के बाद से शेयर की चाल में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। साल-दर-साल 38.25% की गिरावट के बाद हाल में कुछ तेजी लौटी है, क्योंकि बाजार कंपनी की ग्रोथ स्टोरी का आकलन कर रहा है। कंपनी के बोर्ड ने हाल ही में स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक (Standard Chartered Bank) से ₹20 करोड़ का लोन और एवियोम फूडटेक के लिए ₹5 करोड़ की कॉर्पोरेट गारंटी (corporate guarantee) को मंजूरी दी है, जो अधिग्रहण और इंटीग्रेशन प्लान्स के लिए जरूरी भारी-भरकम कैपिटल को दर्शाता है।
DSM Fresh Foods ऐसे मार्केट में उतर रही है जहां कन्वीनियंस और बदलते स्वाद की वजह से कंज्यूमर की भारी मांग है। भारत का फ्रोजन फूड्स मार्केट 2034 तक ₹643.64 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो सालाना 12.86% की दर से बढ़ेगा। वहीं, रेडी-टू-कुक (RTC) सेगमेंट 2034 तक USD 12.0 बिलियन का हो सकता है, जिसमें सालाना 5.90% की ग्रोथ देखी जाएगी। इस ग्रोथ के पीछे अर्बनाइजेशन, बढ़ती आय और भागदौड़ भरी जीवनशैली जैसे कारण हैं। 'मीवा फूड्स' के जरिए कंपनी फ्रोजन वेजिटेरियन स्नैक्स सेगमेंट को टारगेट कर रही है, जहां ऐसे प्रोडक्ट्स की मार्केट में पहले से 52% हिस्सेदारी है।
इस विस्तार के साथ कुछ बड़े रिस्क भी जुड़े हैं। विभिन्न प्रोडक्ट लाइन्स, जैसे फ्रोजन स्नैक्स, रेडी-टू-कुक मील्स और मसालों को फ्रेश मीट के साथ इंटीग्रेट करना, अगर कुशलता से मैनेज न हो तो प्रॉफिट मार्जिन को कम कर सकता है। कंपनी सप्लायर्स पर भी निर्भर है, जहां टॉप 10 सप्लायर्स से FY25 में मटेरियल कॉस्ट का 57.57% आया था, जो सप्लाई चेन के लिए एक रिस्क है। Zappfresh फ्रेश मीट सेगमेंट, खास तौर पर चिकन पर बहुत ज्यादा निर्भर है, जो FY25 के ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 54% से ज्यादा था, जिससे कंपनी इस कैटेगरी की प्राइस वोलेटिलिटी (price volatility) के प्रति सेंसेटिव हो जाती है। वहीं, प्रमोटर्स की कम होल्डिंग (लगभग 28.11%) भी निवेशकों को चिंतित कर सकती है। डेटर डेज़ (Debtor days) का 32.4 से बढ़कर 47.1 दिन होना वर्किंग कैपिटल पर संभावित दबाव का संकेत देता है।
DSM Fresh Foods इस फाइनेंशियल ईयर में अपने नए फ्रोजन सब्सिडियरी से ₹70 करोड़ का रेवेन्यू टारगेट कर रही है। कंपनी 'मीवा फूड्स' ब्रांड के लिए अमेरिका (US), यूके (UK) और यूरोप जैसे इंटरनेशनल मार्केट को भी एक्सप्लोर कर रही है, साथ ही डोमेस्टिक सेल्स नेटवर्क, खासकर दक्षिणी और पश्चिमी भारत में विस्तार कर रही है। यह भारत में प्रोटीन-रिच फूड्स की बढ़ती मांग के अनुरूप है। हालांकि, इस विस्तार की सफलता कई तरह के बिजनेस को इंटीग्रेट करने और कैपिटल को कुशलता से मैनेज करने पर निर्भर करेगी, जो IPO के बाद बाजार का एक अहम फोकस रहेगा।