Wipro Consumer Care ने FY26 में **9.3%** की बढ़ोतरी के साथ **₹11,600 करोड़** का रेवेन्यू दर्ज किया है। कंपनी ने फिलीपींस की S Brands का अधिग्रहण कर साउथ ईस्ट एशिया के हेयर केयर मार्केट में अपनी पैठ और मजबूत की है। हालांकि, बढ़ती इनपुट कॉस्ट, खासकर पाम ऑयल और पैकेजिंग की कीमतों में इजाफे से कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ा है।
Detailed Coverage
Wipro Consumer Care का शानदार प्रदर्शन
Wipro ग्रुप की कंज्यूमर गुड्स (Consumer Goods) कंपनी, Wipro Consumer Care ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में ₹11,600 करोड़ का कुल ग्रॉस टर्नओवर (Gross Turnover) हासिल किया है। यह पिछले साल के मुकाबले 9.3% की बढ़ोतरी है। कंपनी की इस ग्रोथ का मुख्य कारण सेल्स वॉल्यूम (Sales Volume) में सुधार और डोमेस्टिक (Domestic) व इंटरनेशनल (International) मार्केट्स में कंज्यूमर डिमांड (Consumer Demand) का वापस पटरी पर लौटना है। खासकर, दिसंबर 2025 की तिमाही में कंपनी के रेवेन्यू में 12.7% का उछाल देखने को मिला, जो ग्रोथ की रफ्तार को दर्शाता है।
फिलीपींस में बढ़ाई पहुंच: S Brands का अधिग्रहण
इंटरनेशनल ग्रोथ को और रफ्तार देने के लिए, Wipro Consumer Care ने फिलीपींस की पर्सनल केयर (Personal Care) मैन्युफैक्चरर S Brands का अधिग्रहण पूरा कर लिया है। यह कंपनी का 16वां अधिग्रहण है और 2020 के बाद यह पहला बड़ा कदम है। S Brands और इसके प्रमुख हेयर ट्रीटमेंट प्रोडक्ट KERATINplus को शामिल करने के बाद, Wipro का लक्ष्य फिलीपींस में अपनी स्थिति और मजबूत करना है। फिलीपींस अब कंपनी का ग्लोबल लेवल पर तीसरा सबसे बड़ा मार्केट बन गया है। इस अधिग्रहण से Wipro को अपनी मौजूदा लोकल डिस्ट्रीब्यूशन (Distribution) इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाने में मदद मिलेगी, जिसमें Splash Corporation के अधिग्रहण से मिले ब्रांड्स भी शामिल हैं।
बढ़ती लागत का मार्जिन पर असर
जहां एक ओर कंपनी का टॉप-लाइन (Top-line) यानी रेवेन्यू ग्रोथ मजबूत बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन (Operating Profit Margins), जो पहले 12.7% था, मार्च और जून 2026 की तिमाहियों में घटकर 10-11% के आसपास आ गया है। इस मार्जिन में गिरावट की एक बड़ी वजह कच्चे माल की बढ़ती कीमतें हैं। Wipro Consumer Care के बिजनेस का लगभग 70% हिस्सा साबुन उत्पादों से आता है, इसलिए कंपनी पाम ऑयल (Palm Oil) की कीमतों के प्रति काफी संवेदनशील है। इसके अलावा, पैकेजिंग (Packaging) और सर्फेक्टेंट (Surfactants) की लागत में बढ़ोतरी, जो क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों से जुड़ी हैं, ने भी मार्जिन पर दबाव बढ़ाया है। मैनेजमेंट इन लागतों को मैनेज करने के लिए प्रोडक्ट्स की कीमतों में एडजस्टमेंट कर रहा है, लेकिन यह देखना बाकी है कि यह रणनीति कितनी प्रभावी साबित होती है।
रीजनल डिमांड और मार्केट रिस्क
अलग-अलग रीजन्स (Regions) में डिमांड के ट्रेंड्स मिले-जुले रहे हैं। डोमेस्टिक मार्केट में, कंपनी ने शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में रिकवरी देखी, जिसे कंज्यूमर गुड्स पर GST रेट में बदलाव और हाई-वैल्यू (High-value) प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ते झुकाव का भी सहारा मिला। हालांकि, इंटरनेशनल ऑपरेशंस (International Operations) को कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मार्च 2026 की तिमाही में, मिडिल ईस्ट (Middle East) में कंपनी की ग्रोथ US-ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण बाधित हुई। आगे चलकर, निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या कंपनी वॉल्यूम ग्रोथ (Volume Growth) बनाए रख पाती है, खासकर अगर ग्रामीण मांग मौसमी मौसम पैटर्न के कारण कम होती है या भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) इंटरनेशनल सप्लाई चेन्स (Supply Chains) को प्रभावित करते रहते हैं। भविष्य में, कंपनी की बेहतर कॉस्ट मैनेजमेंट (Cost Management) के जरिए ऑपरेटिंग मार्जिन को फिर से ठीक करने की क्षमता और S Brands को कितनी जल्दी इंटीग्रेट (Integrate) करके अपेक्षित रेवेन्यू सिनर्जी (Revenue Synergy) हासिल कर पाती है, इस पर भी फोकस रहेगा।
