Whirlpool India अब अपने दम पर आगे बढ़ेगी! कंपनी की अमेरिकी पेरेंट कंपनी ने अपनी हिस्सेदारी घटाई है, जिससे भारतीय मैनेजमेंट को पूरे अधिकार मिल गए हैं। कंपनी ने प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस करते हुए ₹245 करोड़ का मैन्युफैक्चरिंग एक्सपेंशन प्लान भी शुरू किया है। हालाँकि, पहली तिमाही में रेवेन्यू 12% बढ़ा, लेकिन इनपुट कॉस्ट बढ़ने से मुनाफा 29.6% गिर गया। स्टॉक में भारी गिरावट के बाद मैनेजमेंट ने विश्वास जताने के लिए शेयर खरीदे हैं।
Whirlpool India की नई शुरुआत: मैनेजमेंट के हाथ में कमान
Whirlpool India अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, जहाँ अमेरिकी पेरेंट कंपनी Whirlpool Corporation ने अपनी हिस्सेदारी घटाकर 39.7% कर ली है। इस बदलाव से भारतीय बोर्ड को बिज़नेस के फैसले लेने, पूंजी आवंटन और लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजी पर पूरा कंट्रोल मिल गया है। यह पहले के मॉडल से एक बड़ा बदलाव है, जहाँ पेरेंट कंपनी लोकल एंटिटी की दिशा तय करती थी।
प्रीमियम सेगमेंट में ₹245 करोड़ का निवेश
भविष्य की ग्रोथ को गति देने के लिए, कंपनी प्रीमियम होम अप्लायंसेज सेगमेंट पर आक्रामक तरीके से फोकस कर रही है। इसके लिए पुणे की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी को अपग्रेड करने में ₹245 करोड़ का निवेश किया गया है। यह अपग्रेड ख़ास तौर पर हाई-कैपेसिटी और फ्रॉस्ट-फ्री रेफ्रिजरेटर्स पर केंद्रित है। इस निवेश का मकसद है कंपनी की हाई-वैल्यू प्रोडक्ट कैटेगरी में मौजूदगी बढ़ाना, जहाँ आमतौर पर एंट्री-लेवल अप्लायंसेज की तुलना में बेहतर प्रॉफिट मार्जिन मिलते हैं।
नतीजों पर इनपुट कॉस्ट का असर
कंपनी के हालिया फाइनेंशियल नतीजों ने एक मिली-जुली तस्वीर पेश की है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की तुलना में 12.1% बढ़कर ₹2,727 करोड़ हो गया, जो इसके मुख्य प्रोडक्ट्स की स्थिर डिमांड को दर्शाता है। लेकिन, नेट प्रॉफिट 29.6% घटकर ₹102.88 करोड़ रह गया। इस गिरावट की मुख्य वजह इनपुट कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी और कमोडिटी इन्फ्लेशन रहा, जिसने रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाला।
मैनेजमेंट का भरोसा और स्टॉक पर दबाव
पेरेंट कंपनी की हिस्सेदारी बिक्री की खबरों के बीच, निवेशकों का सेंटिमेंट भी प्रभावित हुआ है। स्टॉक अपने 52-हफ्ते के हाई से लगभग 46% गिर चुका है। कंपनी की टर्नअराउंड स्ट्रेटेजी पर विश्वास जताने के लिए, हाल ही में मैनेजिंग डायरेक्टर और CFO सहित छह सीनियर एग्जीक्यूटिव्स ने अपनी पर्सनल सेविंग्स से कंपनी के शेयर खरीदे हैं। कंपनी पर फिलहाल कोई कर्ज नहीं है, जो इन मुश्किल हालातों से निपटने में एक मजबूती देगा।
आगे क्या?
कंपनी ने ₹5.00 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड भी घोषित किया है, जिसकी एक्स-डिविडेंड डेट 28 अगस्त, 2026 है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या नए प्रीमियम प्रोडक्ट लाइन्स कंपनी को सप्लाई चेन और कच्चे माल की लागत के दबाव के बीच अपने प्रॉफिट मार्जिन को रिकवर करने में मदद कर पाती हैं। प्रीमियम मॉडल की ओर यह सफल बदलाव अगले कुछ तिमाहियों में शेयरधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगा।
