जब महंगा व्हे प्रोटीन (Whey Protein) लोगों की पहुंच से बाहर होने लगता है, तो वे प्राकृतिक प्रोटीन के स्रोतों की ओर मुड़ते हैं। भारत में भी ऐसा ही हो रहा है, जहां पनीर, दही और शेक जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह ट्रेंड Akshayakalpa और Epigamia जैसी कंपनियों के लिए कमाई का नया जरिया बन गया है, जो अब अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ा रही हैं।
Detailed Coverage
डेयरी ब्रांड्स बढ़ा रहे क्षमता
व्हे प्रोटीन के दाम ₹3,200 प्रति किलो के पार जाने के बाद, जो पहले लगभग ₹2,000 हुआ करते थे, आम भारतीय अब प्रोटीन से भरपूर देसी चीजों का रुख कर रहे हैं। इस बदलाव का सीधा फायदा डेयरी कंपनियों को मिल रहा है।
Akshayakalpa ने अपने हाई-प्रोटीन मिल्क कैटेगरी में गजब की ग्रोथ देखी है। कंपनी का मासिक रेवेन्यू बढ़कर लगभग ₹10 करोड़ हो गया है, जो पहले ₹5-6 करोड़ के बीच था। इस मांग को पूरा करने के लिए, कंपनी हर दिन 9,000 लीटर दूध बेच रही है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए, कंपनी ₹50 करोड़ का निवेश करके Jadcherla में एक नया प्लांट लगा रही है, जिससे प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ेगी। कंपनी का मानना है कि प्रोटीन अब सिर्फ फिटनेस का हिस्सा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है।
नेचुरल प्रोटीन पर फोकस
कुछ कंपनियां महंगी व्हे प्रोटीन सामग्री जोड़ने के बजाय टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही हैं। Epigamia ऐसी ही एक कंपनी है, जो अल्ट्राफिल्ट्रेशन टेक्नोलॉजी से अपने प्रोडक्ट्स में प्रोटीन को नैचुरली कॉन्सेंट्रेट करती है। इससे उन्हें व्हे प्रोटीन के अस्थिर दामों से निपटने और अपने मार्जिन को स्थिर रखने में मदद मिली है। कंपनी अपने टर्बो रेंज पर फोकस कर रही है और अगले कुछ सालों में अपने प्रोटीन पोर्टफोलियो में डबल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद कर रही है।
नए प्रोडक्ट्स और डिस्ट्रीब्यूशन
बाजार में अब प्रोटीन-युक्त बैटर, पनीर और चपाती जैसे प्रोडक्ट्स भी आ रहे हैं। iD Fresh Food इस सेगमेंट में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। Sid's Farm जैसी कंपनियां भी हाई-प्रोटीन, लैक्टोज-फ्री दूध और फ्लेवर्ड योगर्ट जैसे नए प्रोडक्ट्स ला रही हैं। क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इन प्रोडक्ट्स की उपलब्धता इस ग्रोथ को और तेज कर रही है, जिससे कंपनियां शहरी ग्राहकों तक जल्दी पहुंच पा रही हैं।
