West Coast Paper Mills के मुनाफे में 145% का उछाल, केबल सेगमेंट की दमदार परफॉरमेंस

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
West Coast Paper Mills के मुनाफे में 145% का उछाल, केबल सेगमेंट की दमदार परफॉरमेंस

West Coast Paper Mills ने जून तिमाही में अपने नेट प्रॉफिट में **145.4%** की भारी बढ़ोतरी दर्ज की है, जो कि **₹133.5 करोड़** रहा। कंपनी के टेलीकम्युनिकेशन केबल बिजनेस में आई जबरदस्त रिकवरी इस ग्रोथ की मुख्य वजह बनी है। हालांकि, कंपनी के प्रदर्शन में सुधार हुआ है, लेकिन निवेशकों की नजरें सहायक कंपनी आंध्र पेपर में चल रही लेबर समस्याओं के कारण प्रोडक्शन की स्थिति पर बनी हुई हैं।

West Coast Paper Mills का शानदार रिजल्ट

West Coast Paper Mills Ltd. ने 2026-27 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में दमदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹133.5 करोड़ हो गया है, जो पिछले साल की इसी तिमाही में दर्ज ₹54.4 करोड़ के मुकाबले 145.4% ज्यादा है। नतीजों के बाद बुधवार को कंपनी के शेयर 3.32% चढ़कर ₹616.90 पर बंद हुए।

केबल सेगमेंट ने मचाया धमाल

इस बंपर प्रॉफिट ग्रोथ का सबसे बड़ा श्रेय कंपनी के टेलीकम्युनिकेशन केबल सेगमेंट को जाता है। जहां पेपर और पेपरबोर्ड बिजनेस ने स्थिर ग्रोथ दिखाई, वहीं केबल डिवीजन का रेवेन्यू पिछले साल की ₹73.9 करोड़ की तुलना में दोगुना से ज्यादा बढ़कर ₹152.2 करोड़ हो गया। इस सेगमेंट से होने वाले मुनाफे में जबरदस्त इजाफा हुआ, जो पिछले साल के ₹0.45 करोड़ से बढ़कर ₹74 करोड़ पर पहुंच गया। इस प्रोडक्ट मिक्स में सुधार के चलते कंपनी का EBITDA मार्जिन भी बढ़कर 19.4% हो गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 11.6% था।

आंध्र पेपर में लेबर समस्या का असर

केबल बिजनेस में शानदार प्रदर्शन के बावजूद, कंपनी को अपनी सहायक कंपनी Andhra Paper Ltd. के ऑपरेशंस में चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अप्रैल के अंत में कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स की हड़ताल के कारण कादियाम यूनिट, जो एक महत्वपूर्ण प्लांट है, में प्रोडक्शन बाधित हुआ, जिसके चलते मई में प्लांट में लॉकडाउन लगा दिया गया। हालांकि, 29 मई को लॉकडाउन हटा दिया गया, लेकिन उत्पादन पूरी तरह से जुलाई के मध्य तक ही सामान्य हो पाया। कंपनी के फाइलिंग के अनुसार, यह यूनिट फिलहाल अपनी सामान्य क्षमता का लगभग 93% पर काम कर रही है और मैनेजमेंट जल्द से जल्द प्रोडक्शन को पूरी तरह से बहाल करने पर ध्यान दे रहा है।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

अब निवेशक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि कंपनी इन बिजनेस रिस्क को कैसे मैनेज करती है। पेपर इंडस्ट्री अक्सर लकड़ी की लुगदी (wood pulp) की कीमतों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित होती है, जो एक प्रमुख कच्चा माल है। इसके अलावा, यह इंडस्ट्री सस्ते इंपोर्टेड पेपर से भी कंपटीशन का सामना करती है, जिसका असर लोकल प्राइसिंग पर पड़ता है। पिछली तिमाही की तरह मजबूत मार्जिन बनाए रखने के लिए कंपनी को इनपुट कॉस्ट को मैनेज करना होगा और प्राइसिंग प्रेशर से निपटना होगा।

आगे चलकर, आंध्र पेपर की कादियाम यूनिट में प्रोडक्शन का पूरी तरह से सामान्य होना एक महत्वपूर्ण मॉनिटर रहेगा। शेयरहोल्डर्स यह भी देखेंगे कि क्या टेलीकम्युनिकेशन केबल सेगमेंट का यह हाई प्रॉफिटेबिलिटी ट्रेंड आने वाली तिमाहियों में भी बना रहता है, क्योंकि कंपनी अपने पारंपरिक पेपर बिजनेस के साथ इस बढ़ते वर्टिकल को बैलेंस करने की कोशिश कर रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.