पैकिंग मैटेरियल की किल्लत
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के चलते PET, ग्लास और प्लास्टिक जैसे अहम पैकिंग मटेरियल की सप्लाई में भारी कमी आ गई है। यह मटेरियल परफ्यूम से लेकर अनाज तक, हर तरह के प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग के लिए जरूरी हैं। भारतीय कंपनियाँ अब अपने इन्वेंटरी और प्रोडक्शन की स्ट्रेटेजी पर फिर से विचार कर रही हैं। कई कंपनियाँ 30 से 60 दिन तक का स्टॉक रखती हैं, लेकिन मौजूदा हालात में वह भी खत्म हो रहा है। Kindlife जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों की फाउंडर राधिका घई का कहना है कि अब कम स्टॉक रखने और सबसे ज्यादा बिकने वाले प्रोडक्ट्स (SKUs) पर फोकस करने की जरूरत है। Lotus Herbals के मैनेजिंग डायरेक्टर नितिन पासी के मुताबिक, इस किल्लत का असर कॉस्मेटिक्स पोर्टफोलियो पर भी पड़ रहा है।
बढ़ी लागत, प्रोडक्शन पर मार
सिर्फ सप्लाई की दिक्कत ही नहीं, मटेरियल की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। The Whole Truth, जो प्रोटीन पाउडर और स्नैक बार बनाती है, के मुताबिक पॉलीमर की कीमतें 40% तक बढ़ गई हैं। फ्लेक्सिबल और PET पैकेजिंग जैसे मटेरियल की डिलीवरी टाइमलाइन में अनिश्चितता और बढ़ी हुई कीमतों ने कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। Bagrry's के ग्रुप डायरेक्टर आदित्य बागड़ी बताते हैं कि सिर्फ पैकेजिंग ही नहीं, बल्कि उनके ब्रेकफास्ट सीरियल्स और मूसली में इस्तेमाल होने वाले सूखे मेवों (dry fruits) और नट्स जैसे इंपोर्टेड इंग्रेडिएंट्स की शिपिंग में भी देरी हो रही है।
सरकारी राहत, पर अनिश्चितता जारी
इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने हाल ही में कुछ चुनिंदा पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर तीन महीने के लिए छूट (waiver) दी है, जिससे मार्केट को स्थिर करने में मदद मिलेगी। Srichakra Polyplast के CEO लक्ष्मण के अय्यर का मानना है कि इस तरह के कदम से अल्पावधि (near-term) में थोड़ी राहत मिलेगी और कंपनियाँ धीरे-धीरे अपनी सप्लाई चेन को ठीक कर सकेंगी। हालाँकि, Hindusthan National Glass & Industries जैसी कंपनियों का कहना है कि फ्यूल सप्लाई में छोटी सी रुकावट भी ग्लास कंटेनर बनाने वालों के लिए गंभीर स्ट्रक्चरल नुकसान पहुंचा सकती है, जिसकी रिकवरी में लंबा समय लगता है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि प्रमुख पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव्स के लिए सप्लाई की यह बाधाएँ अभी कई महीनों तक बनी रह सकती हैं, जिससे पैकेज्ड गुड्स सेक्टर का संकट और गहरा सकता है।