Welspun Living के शेयरों में आज जबरदस्त तेजी देखी गई, जो **₹190.70** के 52-Week High स्तर को छू गए। कंपनी ने Q1 FY27 में अपने नेट प्रॉफिट में **83.6%** का शानदार उछाल दर्ज करते हुए **₹161 करोड़** का मुनाफा कमाया है। जहाँ एक ओर घरेलू और ग्लोबल डिमांड इस तेजी को सहारा दे रही है, वहीं निवेशकों की नजरें कंपनी की Vapi मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में आई बाढ़ के असर पर टिकी हैं।
Q1 के नतीजे और ग्रोथ के कारण
Welspun Living के शेयर आज ₹190.70 के नए 52-Week High पर पहुंच गए। यह मार्च 2026 के ₹107.40 के निचले स्तर से 78% की रिकवरी दर्शाता है। यह उछाल कंपनी के 2027 फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के दमदार नतीजों के बाद आया है, जिसमें कंपनी ने मुनाफा और रेवेन्यू दोनों में जोरदार सुधार दिखाया है।
जून 2026 को खत्म हुई तिमाही में, Welspun Living ने ₹2,828 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि से 23.5% ज्यादा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट 83.6% बढ़कर ₹161 करोड़ रहा, जबकि EBITDA मार्जिन 140 बेसिस पॉइंट सुधरकर 12.5% हो गया। कंपनी की वॉल्यूम ग्रोथ, बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और फेवरेबल बिजनेस मिक्स ने इस परफॉर्मेंस में अहम भूमिका निभाई है।
कंपनी के लिए एक बड़ा बूस्ट अमेरिका में पिलो (Pillow) मार्केट में उसका स्ट्रैटेजिक एक्सपेंशन रहा है। ओहियो (Ohio) फैसिलिटी 80% से ज्यादा कैपेसिटी यूटिलाइजेशन पर चल रही है। इसके अलावा, डोमेस्टिक कंज्यूमर बिजनेस ने भी 21.3% रेवेन्यू ग्रोथ के साथ योगदान दिया। यूके (UK) और यूरोप को बढ़े हुए एक्सपोर्ट ऑर्डर भी कंपनी के पॉजिटिव आउटलुक को सपोर्ट कर रहे हैं।
ऑपरेशनल रिस्क और ध्यान देने योग्य बातें
हालांकि, इन शानदार नतीजों के बीच, निवेशकों की नजरें हालिया ऑपरेशनल दिक्कतों पर भी हैं। जुलाई 2026 के आखिर में गुजरात के Vapi स्थित कंपनी के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में आई भीषण बाढ़ से प्रोडक्शन प्रभावित हुआ है। कंपनी इसे जल्द से जल्द सामान्य करने की कोशिश कर रही है, लेकिन इससे आने वाली तिमाही के आउटपुट पर शॉर्ट-टर्म असर पड़ सकता है।
प्लांट की समस्या के अलावा, कंपनी को इंडस्ट्री के अन्य चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। कॉटन जैसे रॉ मटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव मुनाफे पर दबाव डाल सकता है। साथ ही, सितंबर 2026 में RoSTEL (Remission of State and Central Taxes and Levies) एक्सपोर्ट इंसेंटिव स्कीम का खत्म होना भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर है, जो एक्सपोर्ट प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकता है।
निवेशकों के लिए आगे का रास्ता
आने वाले कुछ महीने यह तय करने के लिए अहम होंगे कि क्या कंपनी इन चुनौतियों के बावजूद अपनी ग्रोथ की रफ्तार बनाए रख पाती है। निवेशक Vapi प्लांट के रिकवरी टाइमलाइन और Q2 प्रोडक्शन वॉल्यूम पर मैनेजमेंट की कमेंट्री का इंतजार करेंगे। इसके अलावा, रॉ मटेरियल कॉस्ट और एक्सपोर्ट इंसेंटिव्स पर अपडेट भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
