मीम की वजह से स्टॉक में तूफानी तेजी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच हुई एक बातचीत के वायरल मीम के कारण Parle Industries के शेयर में अचानक तेजी आ गई है। 20 मई 2026 को Parle Industries के शेयर 5% के अपर सर्किट पर पहुंच गए। ऐसा लग रहा है कि यह तेजी निवेशकों द्वारा कंपनी को Parle Products समझने की गलती के कारण आई है, जो कि मेलोडी टॉफी बनाने वाली एक जानी-मानी कंपनी है। हकीकत यह है कि Parle Industries का बिजनेस इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और पेपर रीसाइक्लिंग जैसे सेक्टर में है, और इसका स्नैक या कन्फेक्शनरी बिजनेस से कोई लेना-देना नहीं है। यह स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग सोशल मीडिया के मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ने वाले प्रभाव को दिखाती है, खासकर छोटी कंपनियों के लिए जिनके स्टॉक्स में कम लिक्विडिटी होती है।
Parle Industries के असल फाइनेंशियल आंकड़े
Parle Industries एक स्मॉल-कैप कंपनी है, जिसका मार्केट वैल्यू 21 मई 2026 तक करीब ₹26.90 करोड़ था। कंपनी का कारोबार कन्फेक्शनरी बिजनेस से बिल्कुल अलग है। पिछले एक साल में स्टॉक में 67.78% की भारी गिरावट आई है। पिछले बारह महीनों के लिए Parle Industries का EPS -₹0.02 है, और P/E रेश्यो -205.43 है, जो कि बहुत नकारात्मक है। फाइनेंशियल ईयर 2025-2026 में, कंपनी का रेवेन्यू ₹4.7 करोड़ रहा, जिसमें ₹0.46 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया गया। पिछले एक साल में कंपनी की मार्केट कैप 70.00% गिरी है, और 21 मई 2026 को शेयर का भाव ₹5.51 था।
Parle Products: अनलिस्टेड FMCG सेक्टर का लीडर
Parle Products, जो असल में मेलोडी टॉफी बनाती है, एक बड़ी प्राइवेट कंपनी है। 31 मार्च 2025 तक इसका रेवेन्यू लगभग ₹18,200 करोड़ था। कंपनी का पूरे भारत में एक मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क है और इसके पास Parle-G जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स हैं जिनकी बिक्री काफी अच्छी रही है। खबरें हैं कि Parle Products 2026 में अपना IPO लाने पर विचार कर रही है और इसने इन्वेस्टमेंट बैंक्स के साथ शुरुआती बातचीत शुरू कर दी है। कंपनी आर्थिक रूप से मजबूत है, उस पर कोई कर्ज नहीं है और 31 मार्च 2025 तक उसके पास ₹6,000 करोड़ से अधिक की नकदी और निवेश था।
FMCG सेक्टर के सामने चुनौतियां
भले ही Parle Industries के शेयर में नाम की गलती के कारण उछाल आया हो, लेकिन जिस FMCG सेक्टर में Parle Products काम करती है, वह अलग चुनौतियों का सामना कर रहा है। कच्चे तेल जैसी कमोडिटी की बढ़ती कीमतों के कारण पैकेजिंग और माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। Parle Products और इसी तरह की अन्य कंपनियों ने 2-7% तक कीमतें बढ़ाई हैं और आगे भी बढ़ोतरी की योजना बना रही हैं। विज्ञापन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता उपयोग भी FMCG कंपनियों के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। भारतीय बिस्किट बाजार, जिसमें Britannia और ITC जैसी कंपनियां भी प्रतिस्पर्धा कर रही हैं, में Parle-G अपनी वैल्यू के कारण मजबूत स्थिति बनाए हुए है। मई 2026 तक, Parle Products भारत का टॉप डोमेस्टिक FMCG ब्रांड बना हुआ है।
