Varun Beverages के Q3 2026 के नतीजों में सेल्स वॉल्यूम **28.7%** बढ़ा है, लेकिन पैकेजिंग की बढ़ती लागत और ऊंचे फाइनेंस खर्चों के चलते निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है, जिससे शेयर में **5.5%** की गिरावट आई है।
मुनाफे पर क्यों दिख रहा दबाव?
30 अक्टूबर, 2026 को जारी परिणामों में कंपनी का रेवेन्यू 33.3% बढ़कर ₹6,815.6 करोड़ पर पहुंच गया है, और नेट प्रॉफिट 13.5% के उछाल के साथ ₹830.6 करोड़ रहा है। हालांकि, ऑपरेशनल फ्रंट पर स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कंपनी के ग्रॉस मार्जिन में 334 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है और यह 53.1% पर आ गया है, जबकि EBITDA मार्जिन भी 140 बेसिस पॉइंट्स घटकर 21.6% रह गया है। जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण एल्युमीनियम कैन्स और पैकेजिंग सामग्री महंगी हो गई है, जिसका सीधा असर कंपनी के मुनाफे पर पड़ा है।
कर्ज और एक्सपेंशन का बोझ
निवेशकों के लिए एक और चिंता का विषय फाइनेंस कॉस्ट का 53.5% बढ़ना है। यह बढ़ोतरी कंपनी द्वारा दक्षिण अफ्रीका में Twizza के अधिग्रहण और भारत में ₹1,000 करोड़ के बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान से जुड़ी है। मार्केट अब इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या ये निवेश भविष्य में सही रिटर्न दे पाएंगे या कर्ज का दबाव आगे और बढ़ेगा।
कॉम्पिटिशन और आगे की रणनीति
बाजार में Campa Cola जैसे खिलाड़ियों से मिल रही कड़ी टक्कर के बीच, कंपनी अपनी रणनीति बदल रही है। कंपनी का फोकस अब लो-शुगर और नो-शुगर प्रोडक्ट मिक्स पर है, जो भारत में अब कुल बिक्री का 88% हिस्सा बन चुके हैं। कंपनी ने ₹0.50 प्रति शेयर के तीसरे अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है, जिसकी रिकॉर्ड डेट 5 नवंबर, 2026 तय की गई है।
