Varun Beverages की चौथी तिमाही 2025 की परफॉरमेंस जबरदस्त रही। कंपनी ने ₹260 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट कमाया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 32% की शानदार ग्रोथ दिखाता है। इस मुनाफे को बढ़ाने में 57% तक घटी फाइनेंसियल कॉस्ट (जो ₹46.6 करोड़ तक आ गई) का बड़ा योगदान रहा। इसके अलावा, कंपनी के रेवेन्यू में भी 13% का उछाल आया और यह ₹4,334.7 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी की सेल्स वॉल्यूम में भी 10.2% की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
शेयर में कमजोरी, वैल्यूएशन पर सवाल?
इतने मजबूत नतीजों और एक बड़े इंटरनेशनल अधिग्रहण की घोषणा के बावजूद, Varun Beverages का शेयर पिछले कुछ समय से दबाव में है। पिछले एक महीने में स्टॉक करीब 7% और पिछले एक साल में लगभग 23% तक गिर चुका है। 3 फरवरी 2026 को यह करीब ₹451.10 के स्तर पर बंद हुआ। यह गिरावट कंपनी के लगातार मुनाफे की ग्रोथ (पिछले 5-year में 51.3% CAGR) के विपरीत है। फिलहाल, कंपनी का P/E रेश्यो (प्राइस-टू-अर्निंग) करीब 53.32x है, जो FMCG सेक्टर के औसत 48.3x से थोड़ा ऊपर है। मार्जिन की बात करें तो EBITDA मार्जिन पिछले साल के 15.2% से घटकर 14.7% हो गया है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
साउथ अफ्रीका में बड़ी छलांग
कंपनी ने रणनीतिक रूप से दक्षिण अफ्रीका की फर्म Twizza को करीब ZAR 2,095 मिलियन (लगभग ₹1,118.7 करोड़) में खरीदने का ऐलान किया है। यह कैश ट्रांज़ैक्शन June 30, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इस अधिग्रहण से Varun Beverages अपनी इंटरनेशनल मौजूदगी को मजबूत करेगा और प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाएगा। यह भारतीय बेवरेज सेक्टर में बढ़ते ट्रेंड्स से मेल खाता है, जहां शहरी खपत, प्रीमियम प्रॉडक्ट्स और नए फ्लेवर की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। अनुमान है कि भारतीय नॉन-अल्कोहलिक बेवरेज मार्केट 2027 तक $88.25 बिलियन तक पहुंच जाएगा।
विश्लेषकों का भरोसा और डिविडेंड
इन सब के बावजूद, विश्लेषकों का Varun Beverages पर भरोसा कायम है। 26 विश्लेषकों में से ज्यादातर 'स्ट्रांग बाय' (Strong Buy) की सलाह दे रहे हैं। उनका औसतन 12 महीने का प्राइस टारगेट ₹600.38 है, जो मौजूदा स्तरों से 27% से ज़्यादा का पोटेंशियल अपसाइड दिखाता है। कंपनी ने शेयरधारकों को रिटर्न देने के लिए ₹0.50 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड भी घोषित किया है।
आगे कंपनी की ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि वह बदलते कंज्यूमर ट्रेंड्स, खासकर हेल्थ-सेंसिटिव प्रॉडक्ट्स की ओर बढ़ते झुकाव को कैसे भुनाती है और अपने नए इंटरनेशनल बाजारों का कितना फायदा उठा पाती है।