Varun Beverages के नतीजों में नेट प्रॉफिट **13.5%** बढ़कर **₹830.59 करोड़** रहा, लेकिन मार्जिन घटकर **21.6%** पर आने से शेयर में **3%** की गिरावट दर्ज की गई। सेल्स वॉल्यूम में बढ़ोतरी के बावजूद बढ़ती पैकेजिंग और फाइनेंस कॉस्ट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
शुक्रवार को Varun Beverages के शेयरों में 3% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। हालांकि कंपनी ने जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए रेवेन्यू और प्रॉफिट में दो अंकों (Double-Digit) की बढ़ोतरी दर्ज की है, लेकिन बाजार ने कंपनी के शानदार सेल्स नंबर्स के बजाय उसके गिरते ऑपरेटिंग मार्जिन पर ज्यादा गौर किया है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का हाल
कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 13.5% बढ़कर ₹830.59 करोड़ हो गया है। वहीं, ऑपरेशंस से रेवेन्यू 33.2% बढ़कर ₹6,607.56 करोड़ पर पहुंच गया है। यह ग्रोथ 28.7% के मजबूत कंसोलिडेटेड सेल्स वॉल्यूम के दम पर आई है, जिसमें घरेलू वॉल्यूम में 22.5% और इंटरनेशनल मार्केट्स में 39.9% का इजाफा हुआ है।
मार्जिन पर क्यों दिखा दबाव?
रेवेन्यू में बड़ी बढ़त के बावजूद कंपनी के EBITDA मार्जिन में 140 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है और यह 23% से फिसलकर 21.6% रह गया। इसकी मुख्य वजह ग्रॉस मार्जिन में 334 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट रही, जिसका कारण कैन (Cans) और फिल्म्स जैसे पैकेजिंग मटीरियल पर बढ़ा खर्च और सप्लाई चेन में आई बाधाएं हैं।
कंपनी के नॉन-बेवरेज सेगमेंट (प्रीफॉर्म्स और कैप्स की बिक्री) के कारण भी घरेलू ग्रॉस मार्जिन पर 100 बेसिस पॉइंट्स का दबाव देखने को मिला। इसके अलावा, फाइनेंस कॉस्ट में 53.5% और डिप्रिसिएशन में 34.5% का उछाल आया है, जो दक्षिण अफ्रीका की फर्म Twizza के अधिग्रहण और उसके एकीकरण के लिए लिए गए कर्ज से जुड़ा है।
आगे की राह
कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए कंपनी ने अब अपने प्रोडक्ट मिक्स में लो-शुगर और नो-शुगर विकल्पों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो अब भारत में उनके बिजनेस का 88% हिस्सा है। हालांकि, इनपुट कॉस्ट का बढ़ता दबाव मुनाफे के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब निवेशक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि कंपनी अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहणों के बाद कर्ज को कैसे मैनेज करती है और मार्जिन को कैसे रिकवर करती है।
