अमेरिका में लगे 50% तक के भारी टैरिफ (tariff) के बावजूद Vahdam India ने अपनी कमाई का ग्राफ ऊपर बनाए रखा है। वित्त वर्ष 2026 (FY26) में कंपनी ने ₹350 करोड़ का रेवेन्यू पार किया, जो कि पिछली बार से 31% की शानदार बढ़ोतरी है। कंपनी का टारगेट अगले फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) तक ₹500 करोड़ का आंकड़ा छूने का है।
लेकिन, इस ग्रोथ के पीछे की कहानी थोड़ी अलग है। कंपनी ने अमेरिका से आने वाले इन टैरिफ्स का बोझ खुद उठाया है, जिसका सीधा असर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ा है। नवंबर 2025 के पॉलिसी बदलाव और फरवरी 2026 में हुए ट्रेड एग्रीमेंट से टैरिफ दरें कम होकर 18% रह गईं, लेकिन तब तक कंपनी भारी लागत झेल चुकी थी।
Vahdam India अब अमेरिका के बड़े रिटेलर्स जैसे Target, Walmart और Costco में भी अपने प्रोडक्ट्स बेच रही है। इस विस्तार से बिक्री तो बढ़ेगी, लेकिन बड़े रिटेलर्स अक्सर कम होलसेल प्राइस (wholesale price) और प्रमोशन सपोर्ट की मांग करते हैं, जिससे Vahdam के प्रॉफिट मार्जिन पर और भी दबाव बढ़ रहा है। सप्लीमेंट्स (supplements) का बाजार, जहां Vahdam अपनी 30% कमाई करता है, काफी कॉम्पिटिटिव (competitive) है। कई कंपनियां भारी मार्केटिंग पर खर्च कर रही हैं। वहीं, कंपनी का पारंपरिक ब्लैक टी (black tea) का बाजार स्थिर हो गया है, जिससे नए रास्ते खोजना जरूरी हो गया है।
कंपनी भारत के घरेलू बाजार पर भी फोकस बढ़ा रही है, जिसका लक्ष्य FY27 तक ₹100 करोड़ की सालाना बिक्री करना है। यह कदम उन भारतीय ब्रांड्स के लिए एक ट्रेंड सेट कर रहा है जो अपने होम मार्केट को ग्लोबल ग्रोथ का बेस बना रहे हैं। Vahdam इंडिया ने खास तौर पर हल्दी (turmeric) और अश्वगंधा (ashwagandha) जैसे फंक्शनल हर्बल सप्लीमेंट्स पर जोर दिया है, क्योंकि दुनिया भर में लोग वेलनेस (wellness) प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। कंपनी का डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (DTC) मॉडल, Shopify Plus जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके ग्राहकों से सीधा जुड़ने में मदद कर रहा है।
Vahdam India के लिए सबसे बड़ा रिस्क (risk) उपभोक्ता खर्च (consumer spending) पर निर्भरता है, जिससे आर्थिक मंदी का असर पड़ सकता है। बड़े रिटेलर्स के साथ डील और बढ़ती प्रतिस्पर्धा से मार्जिन पर दबाव बना रहेगा। हालांकि, भारत में विस्तार और वेलनेस ट्रेंड्स कंपनी को आगे बढ़ा सकते हैं। FY27 के लिए ₹500 करोड़ के रेवेन्यू का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, जो कंपनी की मैनेजमेंट क्षमता और बदलते बाजार के साथ तालमेल बिठाने की काबिलियत पर निर्भर करेगा।
