नतीजों पर एक नज़र: स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड परफॉर्मेंस
Q3 FY26 के नतीजों के अनुसार, Vadilal Industries को स्टैंडअलोन ऑपरेशंस पर ₹14.28 करोड़ का नेट लॉस हुआ। पिछले साल की इसी तिमाही (Q3 FY25) में कंपनी ने ₹7.47 करोड़ का मुनाफा कमाया था। इसके चलते, बेसिक और डाइल्यूटेड ईपीएस (EPS) भी (₹19.87) के निगेटिव टेरिटरी में चला गया, जबकि पिछले साल यह ₹10.39 था।
कंसोलिडेटेड लेवल पर, ऑपरेशंस से होने वाली आय 16.76% बढ़कर ₹238.02 करोड़ हो गई। इसके बावजूद, कंपनी ने ₹0.15 करोड़ का नेट लॉस रिपोर्ट किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹11.93 करोड़ के मुनाफे से एक बड़ा उलटफेर है। कंसोलिडेटेड ईपीएस भी गिरकर (₹0.22) हो गया, जो पिछले साल ₹16.60 था।
नौ महीनों की अवधि (9MFY26) में भी मुनाफे में गिरावट देखी गई। स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 44.81% घटकर ₹52.33 करोड़ रहा, जबकि रेवेन्यू 4.14% बढ़कर ₹811.99 करोड़ पर पहुंचा। कंसोलिडेटेड लेवल पर, रेवेन्यू 12.62% की ग्रोथ के साथ ₹1,085.23 करोड़ रहा, लेकिन नेट प्रॉफिट 21.88% गिरकर ₹100.25 करोड़ रह गया।
मुनाफे में गिरावट की मुख्य वजहें
इस तिमाही में स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 3.31% की गिरावट आई। कंपनी के खर्चे, स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड दोनों ही नतीजों में पिछले साल के मुकाबले बढ़े हैं। 'अन्य आय' (Other Income) में आई भारी कमी ने दोनों सेगमेंट की प्रॉफिटेबिलिटी पर बुरा असर डाला।
खास वजहें और कंपनी की नई चाल
कंपनी ने सरकार द्वारा नोटिफाई किए गए चार लेबर कोड्स के कारण ₹4.18 करोड़ का एडिशनल एम्प्लॉई बेनिफिट एक्सपेंस (Employee Benefit Expense) बुक किया है। इसके अलावा, बोर्ड ने प्रमोटर ग्रुप की तीन कंपनियों - Vadilal Finance Company Private Limited, Veronica Constructions Private Limited, और Vadilal International Private Limited - के Vadilal Industries Limited के साथ अमाल्गमेशन (Amalgamation) की स्कीम को मंजूरी दे दी है। इस स्कीम को आवश्यक अप्रूवल के लिए स्टॉक एक्सचेंजों में फाइल कर दिया गया है।
आगे की राह
मैनेजमेंट की ओर से कोई फॉरवर्ड-लुकिंग गाइडेंस नहीं दिया गया है, ऐसे में कंपनी की भविष्य की राह अनिश्चित लग रही है। स्टैंडअलोन प्रॉफिटेबिलिटी में इतनी बड़ी गिरावट और कंसोलिडेटेड लेवल पर लॉस में जाना, कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और कॉस्ट मैनेजमेंट पर सवाल खड़े करता है। निवेशक प्रस्तावित अमाल्गमेशन स्कीम के एग्जीक्यूशन और उसके कंपनी की फाइनेंशियल स्ट्रक्चर पर पड़ने वाले असर पर करीब से नज़र रखेंगे। आइसक्रीम और फ्रोजन फूड्स सेक्टर में कड़ा कॉम्पिटिशन (Competition) भी कंपनी के लिए एक लगातार चुनौती बना हुआ है।