Vadilal Enterprises Q3 FY26: रेवेन्यू में भारी गिरावट और नतीजों में आंकड़ों की विसंगतियों से निवेशकों की चिंता बढ़ी
Vadilal Enterprises Limited के बोर्ड ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने अनऑडिटेड वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। इन नतीजों में एक तरफ जहां कंपनी का नेट लॉस (Net Loss) कम हुआ है, वहीं दूसरी ओर उसके रेवेन्यू (Revenue) में भारी गिरावट दर्ज की गई है। लेकिन सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि कंपनी के वित्तीय आंकड़ों में कुछ ऐसी विसंगतियां (Discrepancies) मिली हैं, जो निवेशकों के लिए बड़ा सवाल खड़ी कर रही हैं।
तिमाही के आंकड़े
Q3 FY26 में Vadilal Enterprises को ₹16.12 करोड़ का नेट लॉस हुआ। यह पिछले साल की Q3 FY25 के ₹18.31 करोड़ के लॉस की तुलना में 12.0% का सुधार है।
हालांकि, रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (Revenue from Operations) में भयानक 71.5% की साल-दर-साल (YoY) गिरावट आई है, जो Q3 FY25 में ₹926.00 करोड़ से घटकर Q3 FY26 में मात्र ₹264.39 करोड़ रह गया।
इसके विपरीत, कंपनी की टोटल इनकम (Total Income) में 35.9% की सालाना बढ़त देखी गई, जो ₹137.03 करोड़ से बढ़कर ₹186.21 करोड़ हो गई।
कंपनी के कुल खर्च (Total Expenses) में 3.9% की मामूली बढ़ोतरी हुई और यह ₹167.74 करोड़ पर पहुंच गया।
बेसिक और डाइल्यूटेड ईपीएस (Basic and diluted EPS) (₹186.86) रहा, जो पिछले साल के (₹122.50) से काफी गिर गया है।
नौ महीनों के नतीजे
नौ महीनों (Nine Months) की अवधि के लिए, Vadilal Enterprises ने ₹16.7 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल के ₹14.9 करोड़ से 12.1% ज्यादा है।
लेकिन इस अवधि में रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस 20.0% घटकर ₹895.33 करोड़ रह गया, जो पिछले साल ₹1119.02 करोड़ था।
नौ महीनों की टोटल इनकम 3.4% बढ़कर ₹929.81 करोड़ हुई, जबकि कुल खर्च 2.8% बढ़कर ₹910.15 करोड़ रहा।
नौ महीनों का ईपीएस ₹170.05 रहा, जो पिछले साल के ₹167.97 से मामूली बढ़त दिखाता है।
आंकड़ों में विसंगतियां (Data Anomalies)
अब बात करते हैं सबसे गंभीर चिंता के मुद्दे की – वित्तीय आंकड़ों में विसंगतियां। Q3 FY26 के नतीजों में यह साफ दिख रहा है कि 'रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस' (₹264.39 करोड़) 'टोटल इनकम' (₹186.21 करोड़) से कहीं ज्यादा है। यह सामान्य वित्तीय प्रैक्टिस के विपरीत है।
इससे भी बड़ी बात, जब हम 'टोटल इनकम' (₹186.21 करोड़) में से 'टोटल एक्सपेंस' (₹167.74 करोड़) को घटाते हैं, तो ₹18.47 करोड़ का प्रॉफिट आता है। लेकिन कंपनी ने 'प्रॉफिट/(लॉस) बिफोर टैक्स' ((₹21.53) करोड़) का फिगर दिखाया है। यानी, सीधा गणित करने और रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के बीच ₹40 करोड़ से ज्यादा का भारी अंतर है। यह विसंगति कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग की सटीकता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
ऑडिटर की रिपोर्ट और एकमुश्त खर्च
दिलचस्प बात यह है कि कंपनी के ऑडिटर ने अपनी लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट में कहा है कि उन्हें 'कोई ऐसी बात ध्यान में नहीं आई जिससे यह लगे कि कोई बड़ी गलतबयानी हुई है'। लेकिन सामने आ रही आंकड़ों की गड़बड़ियां इस दावे पर संदेह पैदा करती हैं।
सरकार द्वारा चार लेबर कोड लागू करने के कारण, कंपनी ने ग्रैच्युटी और कंपेंसेटेड एब्सेंसेज से संबंधित ₹2.90 करोड़ का अकाउंटिंग प्रभाव (Accounting Impact) दर्ज किया है। यह प्रभाव एम्प्लॉई बेनिफिट एक्सपेंस के तहत दिखाया गया है।
जोखिम और भविष्य की राह
कंपनी ने भविष्य की संभावनाओं (Outlook) को लेकर कोई गाइडेंस (Guidance) या मैनेजमेंट कमेंट्री (Management Commentary) नहीं दी है। ऐसे में, निवेशकों के लिए सबसे बड़े जोखिम 71.5% के भारी रेवेन्यू फॉल और वित्तीय नतीजों में मिली इन आंकड़ों की विसंगतियां ही हैं। इन अस्पष्ट आंकड़ों के चलते भविष्य का अनुमान लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है। निवेशकों को इन विसंगतियों पर बारीकी से गौर करने की जरूरत है, क्योंकि कंपनी की भविष्य की दिशा और स्थिरता को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है।