Retail Sector Crisis: V2 Retail में 19% की भारी गिरावट, DMart भी फिसला, निवेशकों में खलबली

CONSUMER-PRODUCTS
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Retail Sector Crisis: V2 Retail में 19% की भारी गिरावट, DMart भी फिसला, निवेशकों में खलबली

रिटेल स्टॉक्स में आज बिकवाली का जबरदस्त दबाव देखने को मिला है। V2 Retail का शेयर **19%** टूटकर अपने 52-वीक निचले स्तर पर पहुंच गया है, जबकि DMart भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। बाजार में शहरी मांग में कमी और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से मिल रही कड़ी टक्कर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

भारतीय रिटेल बाजार के लिए सोमवार का दिन काफी निराशाजनक रहा। निवेशकों के मन में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और गिरती कंज्यूमर डिमांड को लेकर डर साफ दिख रहा है। इसका सबसे बुरा असर V2 Retail पर पड़ा, जिसका शेयर 19.3% लुढ़क कर ₹162.33 के 52-वीक लो (Low) पर पहुंच गया। वहीं, Avenue Supermarts (DMart) का शेयर भी 4% गिरकर ₹3,643.60 के आसपास ट्रेड कर रहा है।

V2 Retail: धीमी सेल्स से बढ़ी चिंता

V2 Retail की पिटाई के पीछे कंपनी का हालिया परफॉर्मेंस अपडेट मुख्य वजह है। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में कंपनी की कुल रेवेन्यू ग्रोथ तो हुई, लेकिन 'सेम-स्टोर सेल्स ग्रोथ' (Same-store sales growth) केवल 0.5% रही। यह मामूली आंकड़ा निवेशकों को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि कंपनी अपने पुराने स्टोर्स से सेल बढ़ाने में काफी संघर्ष कर रही है।

DMart पर क्विक-कॉमर्स का साया

उधर, Avenue Supermarts ने दूसरी तिमाही में ₹19,206 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 18.4% अधिक है। इसके बावजूद शेयर में गिरावट यह बताती है कि बाजार अब रेवेन्यू नंबरों से आगे की चुनौती को देख रहा है। आज Blinkit, Zepto और Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स जिस रफ्तार से शहरी घरों में अपनी पैठ बना रहे हैं, उससे DMart के पारंपरिक हाइपरमार्केट मॉडल पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

सेक्टर के सामने दोहरी चुनौती

रिटेल सेक्टर इस समय दो बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है। पहला, गैर-जरूरी सामानों (non-essential items) पर शहरी खर्च में कमी आ रही है। दूसरा, क्विक-कॉमर्स की सुविधा और रफ्तार ने ग्राहकों की खरीदारी की आदतें बदल दी हैं। पारंपरिक स्टोर्स के लिए इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सुविधा का मुकाबला करना कठिन होता जा रहा है, जिससे उनके मार्जिन पर बुरा असर पड़ने की आशंका है।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ये कंपनियां बदलते माहौल में खुद को कैसे ढालती हैं और त्योहारों के सीजन में सेल्स का आंकड़ा क्या तस्वीर पेश करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.