महंगाई की मार से United Spirits के लोकप्रिय ब्रांड्स की बिक्री में **22.7%** की भारी गिरावट आई है। कंपनी अब अपना पूरा फोकस प्रीमियम पोर्टफोलियो पर शिफ्ट कर रही है, जो अब रेवेन्यू का **94%** हिस्सा बन चुका है।
प्रीमियम पर शिफ्ट की रणनीति
Diageo के मालिकाना हक वाली United Spirits अब अपने बिजनेस मॉडल को तेजी से बदल रही है। कंपनी का ध्यान अब सस्ते और पॉपुलर ब्रांड्स से हटकर महंगे और हाई-मार्जिन वाले उत्पादों पर है। सितंबर तिमाही के दौरान कंपनी के पॉपुलर सेगमेंट, जिसमें McDowell’s जैसे ब्रांड शामिल हैं, की नेट सेल्स 22.7% गिरकर ₹181 करोड़ रह गई है। अब कंपनी के कुल रेवेन्यू में इनका योगदान महज 6% ही बचा है। इसके उलट, 'प्रेसिडेंट और उससे ऊपर' (Prestige and Above) वाली कैटेगरी में 6% की ग्रोथ दर्ज की गई है, जो अब कंपनी के कुल रेवेन्यू का 94% हिस्सा है। महंगाई के कारण आम ग्राहकों की क्रय शक्ति कम हुई है, जिसे देखते हुए कंपनी ने यह बदलाव किया है।
बढ़ती लागत और ऑपरेशनल चुनौतियां
प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव के बावजूद कंपनी के सामने ऑपरेशनल दिक्कतें बरकरार हैं। सितंबर तिमाही में ग्लोबल लॉजिस्टिक्स और एनर्जी की बढ़ती लागत ने कंपनी के खर्चों में ₹50 करोड़ का अतिरिक्त भार डाला है। इसके अलावा, एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) के दाम भी बढ़े हैं। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से स्कॉच पर ड्यूटी कम हो सकती है, जिससे लागत का कुछ दबाव कम हो सकता है, लेकिन फिलहाल यह अनिश्चित बना हुआ है।
DRI की जांच और रिस्क
निवेशकों की नजरें सरकारी एजेंसी DRI की जांच पर भी टिकी हैं, जो कंपनी द्वारा स्कॉच व्हिस्की के आयात वर्गीकरण (Classification) की जांच कर रही है। इस जांच का नतीजा प्रीमियम पोर्टफोलियो की लागत संरचना को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों के बदलते रेगुलेटरी नियम भी कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। फिलहाल कंपनी की पूरी रणनीति 'प्रीमियमाइजेशन' (Premiumization) पर टिकी है, ताकि वे बढ़ती रॉ-मटेरियल लागत के बीच अपने मार्जिन को सुरक्षित रख सकें।
