United Spirits vs FSSAI: कोर्ट में घमासान! इन पॉपुलर Brands पर लगा बैन, जानें क्या है पूरा मामला

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AuthorNeha Patil|Published at:
United Spirits vs FSSAI: कोर्ट में घमासान! इन पॉपुलर Brands पर लगा बैन, जानें क्या है पूरा मामला

United Spirits Limited (USL) इन दिनों Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) के साथ कानूनी पचड़े में फंसी हुई है। FSSAI ने कंपनी के कई प्रमुख Brands, जिनमें McDowell’s No. 1 Celebration Rum और Royal Challenge Whisky शामिल हैं, पर बिक्री का बैन लगा दिया है। कंपनी का कहना है कि यह बैन सही प्रक्रिया का पालन किए बिना लगाया गया है, जबकि रेगुलेटर लेबलिंग को लेकर सवाल उठा रहा है। Bombay High Court ने सरकार से इस मामले पर **19 अगस्त 2026** तक जवाब मांगा है, जो निवेशकों के लिए एक अहम तारीख है।

जानिए क्या है मामला?

Global liquor giant Diageo की भारतीय सब्सिडियरी United Spirits Limited (USL) और FSSAI के बीच एक बड़ी कानूनी जंग छिड़ गई है। FSSAI ने कंपनी के कई सबसे ज्यादा बिकने वाले प्रोडक्ट्स, जैसे McDowell’s No. 1 Celebration Rum, Royal Challenge Whisky, और Antiquity Blue Whisky पर बिक्री पर रोक लगा दी है। USL ने इस ऑर्डर को Bombay High Court में चुनौती दी है और कहा है कि FSSAI ने इस तरह के बैन लगाते समय उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

लेबलिंग पर है विवाद

असली झगड़ा प्रोडक्ट्स की लेबलिंग को लेकर है। FSSAI का कहना है कि स्पिरिट्स में इस्तेमाल होने वाले आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग (artificial flavouring) को लेकर उनकी चिंताएं हैं और ये प्रोडक्ट्स मौजूदा फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स (food safety standards) के हिसाब से नहीं हैं। रेगुलेटर का तर्क है कि लेबल पर इस्तेमाल होने वाली सामग्री की सही जानकारी होनी चाहिए और रम या व्हिस्की का फ्लेवर आर्टिफिशियल तरीके से नहीं, बल्कि नेचुरल फर्मेंटेशन (natural fermentation) और मैचुरेशन (maturation) प्रोसेस से आना चाहिए। वहीं, United Spirits का कहना है कि उनकी लेबलिंग और प्रोडक्शन प्रैक्टिसेज (production practices) सभी लागू कानूनों के अनुसार हैं। कंपनी ने कोर्ट में यह भी दलील दी है कि यह बैन जल्दबाजी में लगाया गया, क्योंकि FSSAI उसी समय इन लेबलिंग रूल्स पर इंडस्ट्री के साथ कंसल्टेशन (consultation) कर रहा था।

कोर्ट का अगला कदम

Bombay High Court ने 10 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई की, लेकिन कंपनी को तत्काल कोई राहत नहीं मिली। कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले पर अपना ऑफिशियल जवाब 19 अगस्त 2026 तक दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई तक इन पॉपुलर Brands की रेगुलेटरी स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।

पैकेजिंग पर भी चिंता

लेबलिंग विवाद के अलावा, कंपनी को पैकेजिंग मटेरियल (packaging material) को लेकर भी अलग रेगुलेटरी जांच का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों ने कंपनी के लगभग 18,000 केस लिकर प्रोडक्ट्स को क्वारंटाइन (quarantine) कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोतलों में इस्तेमाल होने वाले रीसाइकल्ड प्लास्टिक (recycled plastic) में इंडियन सेफ्टी रेगुलेशंस (Indian safety regulations) द्वारा जरूरी फूड-ग्रेड मार्किंग (food-grade markings) नहीं थी। इससे लगता है कि कंपनी दोहरी चुनौतियों का सामना कर रही है - एक प्रोडक्ट फॉर्मूलेशन लेबलिंग को लेकर और दूसरी फिजिकल पैकेजिंग स्टैंडर्ड्स (physical packaging standards) को लेकर।

निवेशकों पर क्या होगा असर?

United Spirits ने एक्सचेंज फाइलिंग्स (exchange filings) में कहा है कि इन रेगुलेटरी कार्रवाइयों का कंपनी के ओवरऑल बिजनेस ऑपरेशंस (business operations) पर कोई बड़ा फाइनेंशियल इंपैक्ट (financial impact) पड़ने की उम्मीद नहीं है। निवेशकों के लिए, यह स्थिति भारतीय बाजार की रेगुलेटरी कॉम्प्लेक्सिटीज (regulatory complexities) को दर्शाती है, जिसे Diageo ने ग्रोथ का एक बड़ा एरिया बताया है। हालांकि कंपनी मार्केट में एक मजबूत प्लेयर बनी हुई है, लेकिन McDowell’s No. 1 जैसे वॉल्यूम-ड्राइविंग (volume-driving) Brands की लगातार शेल्फ अवेलेबिलिटी (shelf availability) बनाए रखना ऑपरेशनल स्टेबिलिटी (operational stability) के लिए बहुत जरूरी है। निवेशक 19 अगस्त की सुनवाई पर नजर रख सकते हैं, क्योंकि कोर्ट का फैसला यह स्पष्ट करेगा कि बिक्री पर लगे प्रतिबंध जारी रहेंगे या उनमें ढील दी जाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.