United Breweries Q1 Results: लागतें बढ़ीं, मुनाफा 9.6% गिरा, फिर भी रेवेन्यू में 10% की उछाल!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
United Breweries Q1 Results: लागतें बढ़ीं, मुनाफा 9.6% गिरा, फिर भी रेवेन्यू में 10% की उछाल!

United Breweries (UBL) ने जून तिमाही के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट **9.6%** घटकर **₹166.28 करोड़** रहा, जिसका मुख्य कारण ऑपरेटिंग खर्चों में हुई बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव को बताया जा रहा है। हालाँकि, प्रीमियम बियर की मजबूत मांग के चलते कंपनी का रेवेन्यू **10%** बढ़कर **₹5,919.44 करोड़** हो गया।

क्यों गिरा कंपनी का मुनाफा?

United Breweries Ltd. (UBL) ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में मिले-जुले नतीजे पेश किए हैं। कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के ₹184.03 करोड़ की तुलना में 9.64% गिरकर ₹166.28 करोड़ दर्ज किया गया। यह गिरावट दर्शाती है कि कंपनी बढ़ती लागतों और कंज्यूमर डिमांड के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष कर रही है।

रेवेन्यू में डबल डिजिट ग्रोथ

इसके विपरीत, कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) ने शानदार प्रदर्शन किया और यह 10% बढ़कर ₹5,919.44 करोड़ हो गया। इस ग्रोथ में बियर सेगमेंट, खासकर प्रीमियम कैटेगरी का बड़ा योगदान रहा। प्रीमियम प्रोडक्ट्स की वॉल्यूम में 17% का इजाफा हुआ, जिसमें Heineken Silver और Kingfisher Ultra जैसे ब्रांड्स ने क्रमशः 28% और 11% की ग्रोथ दर्ज की। कंपनी ने कैश फ्लो (Cash Flow) को बेहतर करने के लिए अपनी इन्वेंटरी (Inventory) को भी 20% कम किया।

लागतों का दबाव और EBITDA मार्जिन पर असर

बिक्री बढ़ने के बावजूद, कंपनी के बॉटम लाइन (Bottom Line) पर कुल खर्चों में 11.7% की भारी बढ़ोतरी का असर पड़ा, जो ₹5,745.66 करोड़ तक पहुँच गया। नतीजतन, EBITDA मार्जिन घटकर 9.22% रह गया, जो पिछले साल 10.85% था। मैनेजमेंट का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण सप्लाई चेन बाधित हुई और ट्रांसपोर्टेशन व रॉ मटेरियल की लागतें बढ़ीं, जिसका सकल लाभ (Gross Profit) पर 300 बेसिस पॉइंट का नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

रेगुलेटरी मुद्दे और भविष्य की चुनौतियाँ

कंपनी को कुछ रेगुलेटरी (Regulatory) चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। पटियाला मार्केट कमेटी की ओर से ₹116.25 करोड़ की टैक्स मांग से जुड़ा एक मामला अभी भी जारी है, जो भविष्य के कैश आउटफ्लो के लिहाज से निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, एल्यूमीनियम और ग्लास जैसे रॉ मटेरियल की कीमतों में लगातार महंगाई मुनाफे के मार्जिन पर दबाव बनाए हुए है।

आगे क्या?

निवेशक अब इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनी बढ़ती लागतों को प्राइसिंग स्ट्रैटेजी (Pricing Strategy) के जरिए ग्राहकों पर डाल पाती है या नहीं। बोर्ड ने फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹10 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) रिकमेंड किया है, जिसकी एक्स-डिविडेंड डेट 7 अगस्त, 2026 है। शेयरहोल्डर्स यह भी देखेंगे कि मैनेजमेंट पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट और इनपुट लागतों को कैसे संभालता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.