लागतों का 'भयंकर' बोझ और सरकारी कीमतों की कैप
United Breweries Ltd. (UBL) के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक गुप्ता ने साफ शब्दों में कहा है कि कंपनी इस वक्त 'बड़ी मुसीबत' के दौर से गुजर रही है। ग्लोबल कमोडिटी की बढ़ती कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन की दिक्कतें प्रोडक्शन कॉस्ट को कम से कम 15% तक बढ़ा चुकी हैं। बोतलों, इंग्रिडिएंट्स (ingredients) जैसी जरूरी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं, साथ ही एल्यूमीनियम कैन (aluminium cans) की किल्लत ने भी परेशानी बढ़ा दी है। यह बढ़ी हुई लागत कम से कम अगले 6 महीने तक बनी रह सकती है।
क्यों फंंसी है कंपनी? सरकारी नियम बने रोड़ा
लेकिन इस बढ़ती लागत से भी बड़ी चुनौती राज्यों द्वारा लगाई गई कीमत सीमा (price cap) है। UBL के 75% कारोबार पर राज्य सरकारों के एक्साइज रूल्स लागू होते हैं, जो कंपनी को अपनी कीमतों को बढ़ाने से रोकते हैं। यानी, जितनी लागत बढ़ रही है, उतना दाम बढ़ाया नहीं जा सकता। गुप्ता ने तेलंगाना का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कंपनी को बीयर के प्रति केस ₹330 मिल रहे हैं, जबकि सरकारी टैक्स ही करीब ₹1,400 है। कंपनी ने सरकार से गुहार लगाई है कि बिक्री मूल्य में 15% की बढ़ोतरी की जाए, जिसे सीधे उपभोक्ताओं पर डालने के बजाय सरकारी रेवेन्यू स्तर पर एडजस्ट किया जाए, ताकि इस दबाव से कुछ राहत मिल सके।
एल्यूमीनियम कैन की किल्लत और महंगा उत्पादन
ऊपर से एल्यूमीनियम कैन की भारी किल्लत भी कंपनी के लिए सिरदर्द बनी हुई है। एल्यूमीनियम के दाम रिकॉर्ड हाई पर हैं, जिससे कैन खरीदना बेहद महंगा हो गया है। गैस की कमी और बढ़ती एल्यूमीनियम लागत के चलते लोकल कैन निर्माताओं ने पहले ही 'फोर्स मेज्योर' (Force Majeure) घोषित कर दिया है, जिससे सप्लाई और घट गई है। बाहर से कैन इंपोर्ट करना भी महंगा साबित हो रहा है। हालांकि, लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन इसके लिए अभी सालों लगेंगे।
ग्राहक हुए समझदार, पीई रेशियो पर सवाल?
महंगाई के इस दौर में ग्राहक भी अब समझदारी से खर्च कर रहे हैं। UBL ने देखा है कि लोग अब इकोनॉमी ब्रांड्स (economy brands) और छोटे पैक साइज (smaller pack sizes) की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। पिछले 2 सालों में जहां वॉल्यूम ग्रोथ 4.5% से 5% सालाना रही, वहीं वैल्यू ग्रोथ 7-8% थी। लेकिन अब इस शिफ्ट के चलते प्रति यूनिट प्रॉफिट कम हो रहा है, जबकि कंपनी का वैल्यूएशन (valuation) काफी ऊंचा है। अप्रैल 2026 तक कंपनी का पीई रेशियो (P/E Ratio) 94-111 के बीच है, जो Radico Khaitan (P/E 80.43) और United Spirits (P/E 58.63) जैसे प्रतिस्पर्धियों से काफी ज्यादा है।
एनालिस्ट्स की राय और आगे क्या?
इन तमाम दिक्कतों के चलते कई एनालिस्ट्स (analysts) UBL को 'होल्ड' (HOLD) रेटिंग दे रहे हैं, और Motilal Oswal जैसे कुछ ब्रोकरेज हाउसेज ने तो 'सेल' (SELL) रेटिंग भी दी है। शेयर अपने हाई लेवल से काफी गिर चुका है और टेक्निकल चार्ट्स पर भी बिकवाली का संकेत मिल रहा है। सरकार की ओर से अगर कुछ राहत नहीं मिली, तो छोटी ब्रुअरीज के लिए टिके रहना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, इंडियन बीयर मार्केट में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन UBL के लिए मौजूदा लागत और रेगुलेटरी माहौल से पार पाना एक बड़ी चुनौती है।
