United Breweries ने दिल्ली में अपनी डिस्ट्रीब्यूशन रणनीति में बड़े बदलाव के बाद सालाना ₹250 करोड़ का रेवेन्यू रन रेट हासिल कर लिया है। हालांकि, प्रीमियम पोर्टफोलियो में मजबूत बिक्री के बावजूद, लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग की बढ़ती लागत कंपनी के मुनाफे पर असर डाल रही है।
दिल्ली में बदली किस्मत
राजधानी दिल्ली में United Breweries ने एक नया मुकाम हासिल किया है। एडि ब्रोसवन (Adie Broswon) डिस्ट्रीब्यूशन के साथ साझेदारी के बाद कंपनी ने अपनी सप्लाई चेन को दुरुस्त किया है, जिससे मांग और सप्लाई का अंतर कम हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में दिल्ली में कंपनी ने 1.5 मिलियन केस बेचे हैं। किंगफिशर स्ट्रॉन्ग का दबदबा बरकरार है, जिसने अकेले 10 लाख केस की बिक्री के साथ बाजार में 10% हिस्सेदारी हासिल कर ली है।
प्रीमियम सेगमेंट में बंपर ग्रोथ
कंपनी अब प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर ज्यादा फोकस कर रही है। किंगफिशर अल्ट्रा मैक्स (Kingfisher Ultra Max) की बिक्री 235% से अधिक और किंगफिशर अल्ट्रा (Kingfisher Ultra) की बिक्री 115% से ज्यादा बढ़ी है। इसी तरह के प्रीमियम पोर्टफोलियो का विस्तार कंपनी केरल, ओडिशा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी कर रही है, जहां Heineken Silver को प्रमोट किया जा रहा है।
मुनाफे की चुनौती
ऑपरेशनल सुधारों के बावजूद कंपनी के फाइनेंशियल रिजल्ट्स में मिली-जुली तस्वीर है। जून तिमाही (FY27) में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 10% बढ़कर ₹5,919.44 करोड़ पर पहुंच गया, लेकिन नेट प्रॉफिट 9.64% गिरकर ₹166.28 करोड़ रह गया। इसकी मुख्य वजह पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और एक्सपोर्ट में आई लागत है। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते सालाना ₹350 से ₹400 करोड़ तक का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
रेगुलेटरी रिस्क और मार्केट का रिएक्शन
निवेशक कंपनी के सामने खड़े रेगुलेटरी खतरों पर भी नजर रखे हुए हैं। पटियाला में ₹116.25 करोड़ के मार्केट कमेटी फीस का नोटिस इस सेक्टर की अनिश्चितता को दर्शाता है। 26 अगस्त 2026 को शेयर ₹1,356.70 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि कंपनी बढ़ती इनपुट कॉस्ट को कैसे मैनेज करती है और डिस्ट्रीब्यूशन के ये सुधार बाकी राज्यों में कितना असर दिखाते हैं।
