Unilever ने अपने फूड डिवीजन को McCormick & Company के साथ **$44.8 बिलियन** में मर्ज करने का ऐलान किया है। इस कदम का मकसद कंपनी के वैल्यूएशन गैप को कम करना है। हालांकि Q2 2026 में कंपनी की ग्रोथ मजबूत रही है, लेकिन निवेशक अभी भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव
Unilever अब एक विशाल कंज्यूमर गुड्स दिग्गज से हटकर फोकस वाली कंपनी बनने की राह पर है। कंपनी का ध्यान अब ब्यूटी, पर्सनल केयर और होम केयर जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर्स पर है। McCormick & Company के साथ हुआ यह $44.8 बिलियन का सौदा कंपनी के ऑपरेशंस को सरल बनाने और बाजार में बेहतर वैल्यूएशन हासिल करने के लिए उठाया गया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें, तो Unilever का ट्रेड 11.5 के अर्निंग मल्टीपल पर हो रहा है, जो इसके प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले काफी कम है। तुलना के लिए, Procter & Gamble 14.8, L'Oreal 17.5 और Coca-Cola 22.7 के मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं। इस 'कॉन्ग्लोमेरेट डिस्काउंट' को खत्म कर कंपनी अपने निवेशकों को बेहतर रिटर्न देने की कोशिश में है।
डील की शर्तें
मार्च 2026 में घोषित इस डील के तहत, Unilever को $15.7 बिलियन नकद मिलेंगे। नई कंपनी में मौजूदा शेयरहोल्डर्स की हिस्सेदारी 55% होगी, जबकि Unilever खुद 9.9% हिस्सेदारी रखेगी, जिसे वह भविष्य में बेचने की योजना बना रही है। ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत, नेपाल और पुर्तगाल के फूड ऑपरेशंस इस मर्जर का हिस्सा नहीं हैं, यानी इन बाजारों में कंपनी का फूड बिजनेस जारी रहेगा।
परफॉर्मेंस और चुनौतियां
जून 2026 तिमाही (Q2) में कंपनी ने एक दशक की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है। इसमें सेल्स में 5.8% और वॉल्यूम ग्रोथ में 5.5% का उछाल दर्ज किया गया है। हालांकि, बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या यह रफ्तार आने वाली 3-4 तिमाहियों तक बनी रहेगी। निवेश के लिहाज से सबसे बड़ा रिस्क 'एग्जीक्यूशन' है। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या कंपनी अपने बचे हुए फूड एसेट्स और मौजूदा ग्रोथ को लंबी अवधि तक बरकरार रख पाती है या नहीं।
