यह मेगा डील Unilever के पोर्टफोलियो को सुव्यवस्थित करने की बड़ी कोशिश का हिस्सा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Unilever अपने फूड बिजनेस के बड़े हिस्से को Spice किंग McCormick & Company के साथ मिलाकर करीब 60 अरब का एक नया फूड वेंचर बनाने के मुहाने पर है।
डील की संरचना और समय
यह एक कैश और स्टॉक डील होगी, जिसमें Unilever के शेयरहोल्डर्स का नए कंबाइंड एंटिटी में करीब दो-तिहाई हिस्सा होगा। डील का एक महत्वपूर्ण हिस्सा, लगभग 16 अरब, कैश में होने की उम्मीद है। 'The Wall Street Journal' की रिपोर्ट के अनुसार, इस सौदे का ऐलान अगले मंगलवार तक हो सकता है।
रणनीतिक फोकस और मार्केट का असर
यह कदम Unilever के लिए अपने बिजनेस को स्ट्रीमलाइन करने और उन एसेट्स पर फोकस करने की रणनीति का हिस्सा है जो कंपनी के मुख्य ग्रोथ लक्ष्यों से मेल नहीं खाते। वहीं, McCormick के लिए यह डील अपने बिजनेस को बड़े पैमाने पर ले जाने का मौका है, जिससे वह पैक्ड फूड्स और सीज़निंग्स (seasonings) के ग्लोबल मार्केट में एक बड़ा प्लेयर बन सके।
इस मर्जर से ग्लोबल फूड इंडस्ट्री की तस्वीर बदल सकती है। McCormick, जो अपने स्पाइसेस और सीज़निंग्स के लिए जानी जाती है, Unilever के स्थापित पैक्ड फूड ब्रांड्स का फायदा उठा सकेगी। 60 अरब का वैल्यूएशन दोनों कंपनियों की मार्केट वैल्यू और ब्रांड स्ट्रेंथ को दर्शाता है। फिलहाल, Unilever (ULVR.L) के शेयर करीब £45.00 के स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं, जिनकी मार्केट वैल्यू 140 अरब से ज़्यादा है। वहीं, McCormick (MKC) के शेयर करीब 170 पर चल रहे हैं, जिसकी मार्केट कैप लगभग 25 अरब है। हालांकि, यह डील बड़ी है, लेकिन इसे Consumer Staples सेक्टर में कंसॉलिडेशन (consolidation) की व्यापक प्रवृत्ति के रूप में भी देखा जा रहा है।
बाजार में Nestle (मार्केट कैप 300 अरब) और General Mills (मार्केट कैप 40 अरब) जैसी बड़ी कंपनियां पहले से मौजूद हैं, जबकि Kraft Heinz (मार्केट कैप 50 अरब) भी अपनी पुनर्गठन (turnaround) की प्रक्रिया से गुजर रही है।
संभावित चुनौतियां
हालांकि, इतनी बड़ी डील में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अलग-अलग रीजन्स और प्रोडक्ट्स वाले फूड बिजनेसेज को एक साथ लाना ऑपरेशनल तौर पर काफी जटिल हो सकता है। इसके अलावा, US Federal Trade Commission (FTC) और यूरोपियन कंपटीशन अथॉरिटीज जैसे रेगुलेटर्स से मंजूरी मिलना एक अहम पड़ाव होगा, खासकर अगर कंबाइंड कंपनी किसी खास प्रोडक्ट एरिया में बहुत बड़ा प्लेयर बन जाए। एंटीट्रस्ट (antitrust) चिंताओं के चलते डील के कुछ हिस्सों को बेचने या लंबी रिव्यू प्रोसेस से गुजरना पड़ सकता है। डील में शामिल 16 अरब का कैश नए कंपनी पर कर्ज का बोझ भी बढ़ाएगा, जिसके लिए सावधानीपूर्वक वित्तीय प्रबंधन की आवश्यकता होगी।
आगे का रास्ता
यह मर्जर दोनों कंपनियों को अपने विस्तृत प्रोडक्ट रेंज और बड़े पैमाने का फायदा उठाकर नए आइडियाज और ज्यादा कस्टमर्स तक पहुंचने में मदद करेगा। एनालिस्ट्स मैनेजमेंट से ऑपरेशंस, सप्लाई चेन एफिशिएंसी और ब्रांड मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के स्पष्ट प्लान की उम्मीद करेंगे। इस डील का लक्ष्य ग्लोबल फूड इंग्रेडिएंट्स और कंज्यूमर गुड्स में एक मजबूत और अनुकूलनीय प्लेयर तैयार करना है।