Unilever Plc और spice maker McCormick & Company के बीच अपने ग्लोबल फूड बिजनेस के बड़े हिस्से को मर्ज करने को लेकर बातचीत एडवांस स्टेज में है। दोनों कंपनियों ने इस पर चर्चा की पुष्टि की है। इस डील का स्ट्रक्चर टैक्स-एफिशिएंट (tax-efficient) होने की उम्मीद है और इसकी वैल्यू करीब $15.7 बिलियन आंकी जा रही है। माना जा रहा है कि Unilever के शेयरहोल्डर्स नई कम्बाइंड कंपनी में करीब 65% हिस्सेदारी रखेंगे। इस डील का सबसे अहम पहलू ये है कि इसमें Hindustan Unilever (HUL) के भारत में चल रहे अहम और तेजी से बढ़ रहे फूड ऑपरेशन्स को शामिल नहीं किया जाएगा।
भारत का परफॉर्मेंस और ग्लोबल चुनौतियां
Hindustan Unilever Limited (HUL) ने जोर देकर कहा है कि उसका फूड बिजनेस कंपनी के लिए core और vital हिस्सा है, जिससे हर साल ₹15,000 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू आता है, जो कुल बिक्री का करीब 22% है। भारतीय यूनिट चाय, केचप और माल्टेड ड्रिंक्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों में लीड करती है। यह फोकस भारत पर है, जबकि Unilever का ग्लोबल पैक्ड फूड डिवीजन कुछ चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस डिवीजन से ग्रुप की कुल बिक्री का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा आता है, लेकिन यह बदलते कंज्यूमर टेस्ट (processed foods से दूरी), स्टोर ब्रांड्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा और वेट-लॉस ड्रग्स (weight-loss medications) की बढ़ती मांग जैसी समस्याओं से जूझ रहा है।
वैल्यूएशन और शेयर का प्रदर्शन
पिछले 12 महीनों में Unilever का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो 20.03 से 26.4 के बीच रहा है। यह PepsiCo (25.1x-26.4x) के करीब है, लेकिन Reckitt Benckiser (10x) से ज्यादा है। Unilever की मार्केट वैल्यू $107.6 बिलियन से $129.59 बिलियन के बीच अनुमानित है। वहीं, McCormick का P/E रेशियो करीब 18.11-18.3 है और इसकी मार्केट वैल्यू लगभग $14.25 बिलियन है। पिछले एक साल में McCormick के शेयर 34.88% गिरे हैं, जबकि Unilever के शेयर 10.50% नीचे आए हैं, जो कंज्यूमर गुड्स मार्केट में व्यापक मुश्किलों को दर्शाते हैं।
एनालिस्ट्स की राय और संभावित जोखिम
Analysts आम तौर पर इस संभावित डील को McCormick के लिए एक सकारात्मक कदम के रूप में देख रहे हैं, जो महत्वपूर्ण रणनीतिक लाभ (strategic benefits) की उम्मीद कर रहे हैं। Bank of America Securities ने 'Buy' रेटिंग और $80 का प्राइस टारगेट दिया है, उनका मानना है कि यह डील अर्निंग्स को बूस्ट करेगी। TD Cowen और Bernstein भी आशावादी हैं। हालांकि, कुछ विश्लेषकों, जैसे Stifel, ने बढ़ती लागतों (rising costs) और हालिया प्रॉफिट शॉर्टफॉल (profit shortfalls) के कारण प्राइस टारगेट कम किए हैं, फिर भी उनका outlook पॉजिटिव है। डील में जोखिम भी हैं। Unilever के ग्लोबल फूड बिजनेस को बदलते डिमांड और प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। Unilever के विभिन्न फूड प्रोडक्ट्स को McCormick की स्ट्रक्चर में सफलतापूर्वक कम्बाइन करना एक बड़ी चुनौती होगी। McCormick के शेयर में भी गिरावट देखी गई है, जो सेक्टर में व्यापक समस्याओं का संकेत देता है।
मर्ज्ड फूड बिजनेस का भविष्य
अगर यह मर्जर सफल होता है, तो यह spice and flavor इंडस्ट्री में एक बहुत बड़ी कंपनी तैयार करेगा। इससे McCormick को बड़े पैमाने, प्रोडक्ट्स की विस्तृत रेंज और ग्लोबल रीच (global reach) मिलेगी। अपने धीमे चलने वाले फूड एसेट्स (slower-moving food assets) को बेचकर और अपने तेजी से बढ़ते भारतीय डिवीजन को बनाए रखकर, Unilever अपने बिजनेस को सरल बनाने और अधिक जीवंत (livelier) बाजारों पर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद कर रहा है। भारत का FMCG मार्केट, जो सालाना 27.9% की दर से बढ़ रहा है, विकसित बाजारों (developed markets) में देखी गई मुश्किलों का एक स्पष्ट विकल्प प्रदान करता है, जो HUL के ऑपरेशन्स को अलग रखने की रणनीतिक समझ को उजागर करता है।