India का प्रदर्शन जोरदार, पर Global दबाव कायम
Unilever के लिए भारत दूसरा सबसे बड़ा बाजार है, और यहाँ कंपनी का प्रदर्शन उम्मीदों से बढ़कर रहा है। खासकर होम केयर (Home Care) सेगमेंट में, 2025 की चौथी तिमाही में 4.7% की अंडरलाइंग सेल्स ग्रोथ (underlying sales growth) दर्ज की गई, जिसमें भारत से अकेले 4% की वॉल्यूम ग्रोथ (volume growth) का बड़ा योगदान रहा। इस शानदार परफॉरमेंस के चलते होम केयर सेगमेंट ने भारत में अपना अब तक का सबसे बड़ा मार्केट शेयर (market share) हासिल कर लिया है। Hindustan Unilever Limited (HUL) ने खुद दिसंबर तिमाही में 5% की अंडरलाइंग सेल्स ग्रोथ (USG) और 4% की अंडरलाइंग वॉल्यूम ग्रोथ (UVG) हासिल की। कंपनी की स्ट्रैटेजी, खासकर प्रीमियम सेगमेंट और डिजिटल ब्रांड्स पर फोकस, भारत जैसे 'एंकर मार्केट्स' में काम कर रही है।
Global चुनौतियाँ और Currency का खेल
इसके बावजूद, Unilever PLC का कुल वैश्विक टर्नओवर (global turnover) 2025 में 3.8% घटकर €50.5 बिलियन रह गया। इसका मुख्य कारण विदेशी करेंसी में आई जबरदस्त गिरावट है, जिसमें भारतीय रुपये (Indian Rupee) का यूरो (Euro) के मुकाबले कमजोर होना भी शामिल है। साथ ही, कंपनी की पोर्टफोलियो रीस्ट्रक्चरिंग (portfolio restructuring) और बेची गई संपत्तियों (net disposals) का भी इस पर असर पड़ा है। जहाँ HUL का स्टॉक अपने घरेलू प्रदर्शन के चलते लगभग 52-54x के फॉरवर्ड पी/ई (forward P/E) पर वैल्यू किया जा रहा है, वहीं Unilever PLC लगभग 23-27x के पी/ई (P/E) पर ट्रेड कर रहा है, जो ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच एक सतर्क वैल्यूएशन को दर्शाता है।
FMCG सेक्टर का भविष्य और HUL की राह
भारतीय FMCG सेक्टर के लिए 2026 काफी उम्मीदों भरा रहने वाला है। महंगाई (inflation) कम होने, कमोडिटी कीमतों में स्थिरता और सरकारी नीतियों के सपोर्ट से इस सेक्टर में हाई सिंगल-डिजिट वॉल्यूम ग्रोथ (high single-digit volume growth) की उम्मीद है। शहरी इलाकों में मांग (demand) बढ़ रही है, जबकि ग्रामीण खपत (rural consumption) भी आय सहायता योजनाओं (income support schemes) के चलते धीरे-धीरे सुधर रही है। HUL की रूरल पेनिट्रेशन (rural penetration) और अर्बन प्रीमियमाइजेशन (urban premiumisation) पर ध्यान केंद्रित करने की स्ट्रैटेजी इन रुझानों के अनुरूप है।
हालांकि, सेक्टर में प्रतिस्पर्धा (competition) लगातार बढ़ रही है, जहाँ रीजनल और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स एक बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। HUL का पी/ई रेशियो लगभग 49-53x है, जो FMCG इंडस्ट्री के औसत 48.3x से थोड़ा ऊपर है, यह कंपनी की मार्केट लीडरशिप और स्टेबल ऑपरेशन्स को दर्शाता है।
Portfolio में बदलाव और नए CEO
Unilever के 2025 के टर्नओवर में 3.8% की गिरावट में, करेंसी के उतार-चढ़ाव ने 5.9% की कटौती की, जबकि कंपनी के पोर्टफोलियो को सुव्यवस्थित करने (strategic portfolio reshaping) और संपत्तियों की बिक्री (disposals) ने टर्नओवर में 1.2% की और गिरावट ला दी। यह दिखाता है कि कंपनी लगातार विस्तार के बजाय बदलाव के दौर से गुजर रही है। मार्च 2025 में Hein Schumacher की नियुक्ति के दो साल से भी कम समय में Fernando Fernandez का नया CEO बनना, रणनीतिक निरंतरता (strategic continuity) और निष्पादन गति (execution speed) पर सवाल खड़े करता है। इसके अलावा, Ben & Jerry's को लेकर कंपनी के आंतरिक टकराव की खबरें भी सामने आई हैं।
Ice Cream डी-मर्जर और Future Outlook
कंपनी अपने आइसक्रीम (ice cream) बिजनेस (Kwality Wall's) को डी-मर्ज (demerge) कर रही है, जो 16 फरवरी 2026 को स्टॉक मार्केट में लिस्ट होगा। यह कदम ऑपरेशन्स को सुव्यवस्थित करने के लिए है, लेकिन यह एक ऐसे बिजनेस यूनिट का स्पिन-ऑफ (spin-off) है जो स्थिर, हालांकि कम मार्जिन वाला, रेवेन्यू स्ट्रीम प्रदान कर सकता था।
आगे 2026 के लिए, Unilever 4% से 6% के बीच अंडरलाइंग सेल्स ग्रोथ (underlying sales growth) की उम्मीद कर रहा है, जिसमें कम से कम 2% की अंडरलाइंग वॉल्यूम ग्रोथ (underlying volume growth) और अंडरलाइंग ऑपरेटिंग मार्जिन (underlying operating margin) में मामूली सुधार का लक्ष्य है। कंपनी US और India जैसे अपने प्रमुख बाजारों में प्रीमियम सेगमेंट, डिजिटल ब्रांड्स और ई-कॉमर्स पर निवेश जारी रखेगी। HUL के लिए, विश्लेषकों को लगातार वॉल्यूम-आधारित ग्रोथ और मार्जिन रिकवरी की उम्मीद है। 2026 के लिए ₹2,480–₹2,850 की रेंज में टारगेट प्राइस (price targets) इस विश्वास को दर्शाते हैं कि कंपनी प्रतिस्पर्धी दबावों को नेविगेट कर सकती है और भारतीय FMCG सेक्टर के सकारात्मक मैक्रो ट्रेंड्स का लाभ उठा सकती है। भारत की स्थानीय ताकत को सतत वैश्विक वित्तीय प्रदर्शन में बदलना Unilever के लिए महत्वपूर्ण होगा।
