Live News ›

Unilever का India पर बड़ा दांव: HUL के लिए नया गेम प्लान, D2C Brands पर फोकस

CONSUMER-PRODUCTS
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Unilever का India पर बड़ा दांव: HUL के लिए नया गेम प्लान, D2C Brands पर फोकस
Overview

Global FMCG दिग्गज Unilever ने अपने पोर्टफोलियो को रीस्ट्रक्चर करने की घोषणा की है, जिसमें India पर खास फोकस रहेगा। कंपनी अब बड़े मर्जर की जगह fast-growing 'super growth assets' यानी छोटी, तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों के अधिग्रहण (acquisitions) पर दांव लगाएगी। वहीं, Unilever की भारतीय सब्सिडियरी Hindustan Unilever (HUL) देश में महंगाई, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और धीमी सेल्स ग्रोथ जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।

India बनेगा Unilever के लिए ग्रोथ का पावरहाउस

Unilever अपने ग्लोबल पोर्टफोलियो को रीफाइन कर रहा है और इसके तहत India और USA जैसी मार्केट्स में छोटी, तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों को एक्वायर करने पर जोर दे रहा है। कंपनी का लक्ष्य 'super growth assets' पर फोकस कर बढ़ती मार्केट्स में अपनी मौजूदगी बढ़ाना और ऑनलाइन एंगेजमेंट को मजबूत करना है। इस स्ट्रैटेजी से कंपनी अपने Beauty, Wellbeing, and Personal Care (BPC) सेगमेंट को टर्नओवर का लगभग 67% तक ले जाना चाहती है।

खास बात यह है कि Unilever अपने ग्लोबल फूड बिजनेस का $44.8 बिलियन में McCormick & Company के साथ मर्जर कर रहा है, लेकिन इस डील से India को बाहर रखा गया है। यह India के लिए Unilever की अलग स्ट्रेटेजिक अहमियत को दर्शाता है। इस रीस्ट्रक्चरिंग के बाद, USA और India मिलकर ग्रुप के टर्नओवर का 38% योगदान देंगे।

HUL की डोमेस्टिक जंग और D2C की ओर बढ़ती रफ्तार

वैश्विक स्तर पर Unilever की इस नई दिशा के बीच, उसकी भारतीय इकाई Hindustan Unilever (HUL) डोमेस्टिक मार्केट में कई मुश्किलों से जूझ रही है। महंगाई, कमजोर कंज्यूमर डिमांड और ऑनलाइन ब्रांड्स से कड़ी टक्कर HUL की सेल्स ग्रोथ पर असर डाल रही है। हालांकि, कंपनी के हालिया नतीजे कुछ हद तक रिकवरी दिखाते हैं, जिसमें Q3 FY26 में रेवेन्यू 6% बढ़ा है और अंडरलाइंग सेल्स में 5% का उछाल आया है। यह पिछले क्वार्टर (Q2) में फ्लैट वॉल्यूम और प्रॉफिट में गिरावट से बेहतर स्थिति है, जो GST ट्रेड डिसरप्शन्स के कारण हुआ था।

इन चुनौतियों से पार पाने और India के बढ़ते प्रीमियम और डिजिटल मार्केट का फायदा उठाने के लिए HUL तेजी से डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स का अधिग्रहण कर रही है। कंपनी ने क्लीन-लेबल वेलनेस ब्रांड Oziva को ₹824 करोड़ में पूरी तरह खरीद लिया है, जिससे यह HUL की फुल-ओन्ड सब्सिडियरी बन गई है। इससे पहले, HUL ने स्किनकेयर ब्रांड Minimalist में भी मेजोरिटी स्टेक खरीदा था। वहीं, कंपनी ने Wellbeing Nutrition में अपनी माइनॉरिटी स्टेक बेचकर पोर्टफोलियो को एडजस्ट किया है।

Indian FMCG मार्केट: प्रीमियम और डिजिटल की बढ़ती डिमांड

India का फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) मार्केट तेजी से बदल रहा है। बढ़ती मिडिल क्लास, हेल्थ और वेलनेस प्रोडक्ट्स की मांग और ई-कॉमर्स व D2C ब्रांड्स का बढ़ता प्रभाव इस बदलाव के मुख्य कारण हैं। प्रीमियमाइजेशन अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि रूरल कंज्यूमर्स भी 'अफॉर्डेबल प्रीमियम' प्रोडक्ट्स की तलाश में हैं। माना जा रहा है कि 2030 तक ई-कॉमर्स FMCG मार्केट का एक बड़ा हिस्सा कैप्चर कर लेगा। इस बदलते कंज्यूमर बिहेवियर को देखते हुए ब्रांड्स नए प्रोडक्ट्स, छोटे पैक्स और डिजिटल चैनल्स के जरिए कस्टमर एंगेजमेंट बढ़ा रहे हैं।

ग्रोथ और वैल्यूएशन पर चिंताएं

वैसे तो एनालिस्ट्स HUL को खरीदने की सलाह दे रहे हैं और अगले 12 महीनों में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद जता रहे हैं, लेकिन कुछ चिंताएं भी हैं। पिछले कुछ सालों में GDP ग्रोथ और FMCG वॉल्यूम ग्रोथ के बीच एक अजीब गैप देखा गया है। कंपनी ने लोकल ब्रांड्स से मार्केट शेयर खोया है और स्टॉक ने भी ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स से पीछे प्रदर्शन किया है। HUL का वैल्यूएशन भी काफी हाई है, अक्सर इसका P/E रेश्यो 50-55 के आसपास रहता है, जो ग्रोथ के अनुमानों पर खरा न उतरने पर जोखिम पैदा कर सकता है।

भविष्य की राह: बदलते मार्केट में ग्रोथ बनाए रखना

Unilever का लक्ष्य मिड-सिंगल-डिजिट सेल्स ग्रोथ हासिल करना है, जिसके लिए कंपनी लगातार इन्वेस्टमेंट और शेयर बायबैक कर रही है। India जैसे हाई-ग्रोथ मार्केट्स पर केंद्रित HPC (Home, Personal Care) बिजनेस का मकसद वॉल्यूम-लेड ग्रोथ और बेहतर रिटर्न हासिल करना है। HUL के लिए सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह D2C एक्विजिशन को कितनी अच्छी तरह इंटीग्रेट कर पाती है, प्रीमियमाइजेशन ट्रेंड का फायदा उठा पाती है और India में इंटेंस कम्पटीशन को कैसे मैनेज करती है। एनालिस्ट्स HUL के रेवेन्यू और नेट इनकम के लिए एक मॉडरेट CAGR का अनुमान लगा रहे हैं, जो लगातार, स्थिर ग्रोथ का संकेत देता है। कंपनी को उम्मीद है कि FY27, FY26 की तुलना में बेहतर रहेगा।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.