Packaged Water Industry: UP में पानी के कारोबार पर बड़ी सख्ती, 2027 तक BIS सर्टिफिकेशन अनिवार्य

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Packaged Water Industry: UP में पानी के कारोबार पर बड़ी सख्ती, 2027 तक BIS सर्टिफिकेशन अनिवार्य

उत्तर प्रदेश सरकार ने पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर यूनिट्स के लिए Bureau of Indian Standards (BIS) सर्टिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। यह डेडलाइन **31 मार्च, 2027** तय की गई है।

पानी में मिलावट पर सरकार का बड़ा एक्शन

उत्तर प्रदेश फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA) ने राज्य में पैकेज्ड पानी के कारोबार को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने कुल 811 सुविधाओं से 660 सैंपल एकत्र किए थे, जिनमें से चौंकाने वाले 513 सैंपल (करीब 78%) या तो घटिया थे या असुरक्षित पाए गए। जांच में इन नमूनों में E. coli, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और फंगस जैसे खतरनाक कंटामिनेंट्स मिले हैं।

छोटे खिलाड़ियों के लिए चुनौती

अब नई यूनिट्स को कामकाज शुरू करने के लिए BIS सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। मौजूदा 968 यूनिट्स को 31 मार्च, 2027 तक का समय दिया गया है। जिन कंपनियों के पास ओजोनाइजेशन या UV ट्रीटमेंट प्लांट जैसी बेसिक सुविधाएं नहीं हैं, उन्हें भारी निवेश करना पड़ सकता है। सरकार ने पहले ही 152 लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं और 55 यूनिट्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है।

FSSAI बनाम यूपी सरकार

दिलचस्प बात यह है कि केंद्र सरकार (FSSAI) ने अक्टूबर 2024 में अनिवार्य BIS सर्टिफिकेशन की अनिवार्यता को खत्म कर दिया था, लेकिन उत्तर प्रदेश ने इसे फिर से लागू किया है। इससे बड़ी कंपनियों के लिए 'ड्यूअल-कंप्लायंस' (Dual-Compliance) का बोझ बढ़ सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

आने वाले समय में इंडस्ट्री में कंसोलिडेशन की पूरी संभावना है। जो कंपनियां मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर पाएंगी, वे बाजार में टिकी रहेंगी, जबकि छोटी और कम पूंजी वाली फर्में बाहर हो सकती हैं। निवेशकों को अब इन 968 यूनिट्स के अनुपालन की गति और सरकारी कार्रवाई पर बारीकी से नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.