Alcohol Sales: विदेशी यात्रा पर रोक से 'देसी' शराब की बिक्री में उछाल! जानें क्या है वजह

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AuthorNeha Patil|Published at:
Alcohol Sales: विदेशी यात्रा पर रोक से 'देसी' शराब की बिक्री में उछाल! जानें क्या है वजह

अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर लगी पाबंदियों के चलते भारत में शराब की बिक्री का पैटर्न बदल रहा है। लोग अब एयरपोर्ट पर ड्यूटी-फ्री दुकानों की जगह अपने देश के अंदर ही प्रीमियम शराब खरीद रहे हैं, जिससे घरेलू रिटेल बाजार को बढ़ावा मिल रहा है।

Detailed Coverage

बदलता कंज्यूमर बिहेवियर

अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर लगी पाबंदियों का सीधा असर भारत के शराब कारोबार पर दिख रहा है। कंज्यूमर्स अब विदेशी एयरपोर्ट पर ड्यूटी-फ्री (Duty-Free) दुकानों में शराब खरीदने के बजाय, देश के अंदर ही रिटेल स्टोर्स, मॉल्स और हाई-स्ट्रीट दुकानों से प्रीमियम और लग्जरी शराब खरीद रहे हैं। यह वही ट्रेंड है जो कोरोना महामारी के दौरान भी देखा गया था, जब लोगों की आवाजाही पर रोक लगी थी।

घरेलू बाजार और प्रीमियम सेगमेंट को बूस्ट

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बदलाव से रिटेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स जैसे Living Liquidz और Cartel Bros जैसी कंपनियों को सीधे फायदा हो रहा है। यह ट्रेंड भारतीय कंज्यूमर्स के बीच महंगी और इम्पोर्टेड (Imported) शराब के प्रति बढ़ते रुझान को भी दिखाता है।

इम्पोर्टेड स्पिरिट्स में लगातार ग्रोथ

IWSR Drinks Analysis के आंकड़ों के अनुसार, भारत में इम्पोर्टेड स्पिरिट्स की बिक्री में 2019 से 2024 के बीच 16% की सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़ोतरी हुई है। स्कॉच व्हिस्की (Scotch Whisky) इस ग्रोथ में सबसे आगे है। अनुमान है कि 2029 तक इम्पोर्टेड स्पिरिट्स की बिक्री में 8% की ग्रोथ जारी रहेगी, भले ही यात्रा के पैटर्न में बदलाव आए। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शराब की बिक्री कुल ट्रैवल रिटेल रेवेन्यू का 58% है, लेकिन घरेलू बिक्री में इसका बढ़ना डोमेस्टिक स्टोर्स के लिए अच्छी खबर है।

निवेशकों के लिए खास बातें

हालांकि, निवेशकों को कुछ बातों पर ध्यान देना होगा। भारत में शराब उद्योग काफी बिखरा हुआ है और हर राज्य में टैक्स, एक्साइज पॉलिसी और लाइसेंसिंग नियम अलग-अलग हैं, जो मुनाफे पर असर डाल सकते हैं। इम्पोर्टेड ब्रांड्स पर निर्भरता का मतलब है कि अगर इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) बढ़ी या फॉरेन एक्सचेंज रेट (Foreign Exchange Rate) में उतार-चढ़ाव आया, तो कीमतों और डिमांड पर असर पड़ सकता है। अगले 5 सालों में भारत में पैसेंजर ट्रैफिक 50% से ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है, ऐसे में डोमेस्टिक रिटेल और ट्रैवल-रिटेल ऑपरेटर्स के बीच कॉम्पिटिशन बढ़ेगा। निवेशकों को राज्य की एक्साइज पॉलिसी में बदलाव, नए रिटेल लाइसेंस और प्रीमियमाइजेशन (Premiumization) के ट्रेंड पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.