टैक्स का डबल अटैक: क्यों मचा हड़कंप?
यूनियन बजट 2026 में सरकार ने रेवेन्यू बढ़ाने के इरादे से तंबाकू उत्पादों पर टैक्स की दरों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी कर दी है. 1 फरवरी 2026 से लागू होने वाले नए नियमों के तहत, सिगरेट पर जीएसटी (GST) की दरें 28% से बढ़कर 40% कर दी गई हैं. इसके साथ ही, सिगरेट की लंबाई के आधार पर एक नया टियर्ड एक्साइज ड्यूटी स्ट्रक्चर लागू किया गया है, जो ₹2,050 से लेकर ₹8,500 प्रति 1,000 सिगरेट स्टिक तक हो सकता है. च्यूइंग टोबैको जैसे उत्पादों पर नेशनल कैलेमिटी कॉन्टिनजेंट ड्यूटी (NCCD) भी 25% से बढ़कर 60% कर दी गई है. इन बढ़ोतरी के चलते, तंबाकू उत्पादों पर कुल टैक्स इंसिडेंस में करीब 40-50% तक का इजाफा होने का अनुमान है.
मार्केट में अफरातफरी: ITC, Godfrey Phillips की हालत खस्ता
टैक्स के इस भारी बोझ का असर तुरंत मार्केट पर दिखा. भारत की सबसे बड़ी सिगरेट निर्माता कंपनी ITC के शेयर में फरवरी 2026 की शुरुआत में करीब 10% की भारी गिरावट आई. पिछले कुछ समय से चल रही गिरावट के साथ, कंपनी की मार्केट वैल्यू में बड़ी सेंध लगी है. वहीं, Godfrey Phillips India Ltd. के शेयर तो 17% से भी ज़्यादा टूट गए. शुरुआती फरवरी 2026 तक ITC का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹4.03-4.05 लाख करोड़ था और TTM P/E करीब 20.22 पर था. Godfrey Phillips का मार्केट कैप लगभग ₹31.1-31.7 हजार करोड़ और P/E करीब 25.26 था.
एनालिस्ट्स की राय: वॉल्यूम घटेगा, दाम बढ़ेंगे
इस फिस्कल बदलावों से सेक्टर पर गहरा असर पड़ने वाला है. Crisil Ratings के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि अगले फाइनेंशियल ईयर में सिगरेट के वॉल्यूम में 6-8% की कमी आ सकती है, क्योंकि कीमतें आसमान छू लेंगी. कंपनियों को बढ़े हुए टैक्स के बोझ को कम करने और मार्जिन बचाने के लिए अपनी कीमतें 25% से 40% तक बढ़ानी पड़ेंगी. लेकिन, यह कदम प्राइस-सेंसिटिव कंज्यूमर्स को दूर कर सकता है, खासकर मास मार्केट सेगमेंट में जो इंडस्ट्री वॉल्यूम का 40-45% है.
VST Industries जैसी दूसरी कंपनियों पर भी दबाव है. हालांकि, ITC अपने डाइवर्सिफाइड बिज़नेस मॉडल (FMCG अदर्स, पेपरबोर्ड्स, एग्री बिज़नेस) के चलते ज्यादा रेजिलिएंट मानी जा रही है. सिगरेट डिविजन ITC के मुनाफे का लगभग 78% PBIT लाता है, लेकिन कुल रेवेन्यू में इसका शेयर सिर्फ 42% के आसपास है, जो एक बड़ा बफर है. वहीं, Godfrey Phillips, जो भारत में Marlboro ब्रांड बेचती है, अपने टोबैको सेगमेंट पर ज़्यादा निर्भर है.
अवैध व्यापार का खतरा और भविष्य का धुंधलका
इतिहास गवाह है कि तंबाकू पर भारी टैक्स लगने से अक्सर अवैध सिगरेट का धंधा बढ़ जाता है, जिससे लीगल प्लेयर्स का मार्केट शेयर और गवर्नमेंट रेवेन्यू दोनों घटते हैं. इंडस्ट्री बॉडीज ने चेतावनी दी है कि यह टैक्स बढ़ोतरी इस चुनौती को फिर से खड़ा कर सकती है. जिस स्टेबल टैक्सेशन रिजीम से इंडस्ट्री को हाल के सालों में फायदा हुआ था, वह अब खत्म हो गई है और पॉलिसी अनसर्टेनिटी का माहौल बन गया है.
सिगरेट निर्माताओं के लिए आने वाला समय मुश्किलों भरा होगा. उन्हें बढ़े हुए कॉस्ट को कंज्यूमर्स पर डालने और सेल्स वॉल्यूम को बनाए रखने के बीच एक नाजुक संतुलन बनाना होगा. एनालिस्ट्स नज़दीकी भविष्य में मार्जिन कॉम्प्रेशन की उम्मीद कर रहे हैं, और अगर कॉस्ट पूरी तरह से पास ऑन नहीं हुई तो EBIT में 40% से ज़्यादा की गिरावट आ सकती है. ITC के Q3 FY26 के नतीजों में सिगरेट सेल्स ग्रोथ (7-8%) और एफएमसीजी-अदर्स सेगमेंट का अच्छा प्रदर्शन दिखा था, लेकिन टैक्स के नए नियम भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा रहे हैं. ब्रोकरेजेस ने भी स्टॉक को डाउनग्रेड किया है और बढ़ी हुई रेगुलेटरी रिस्क की ओर इशारा किया है. इंडस्ट्री को अब घटी हुई अफोर्डेबिलिटी, इलिसिट मार्केट से बढ़ी कंपटीशन और प्राइसिंग स्ट्रैटेजी पर फिर से विचार करने जैसे एडजस्टमेंट के लंबे दौर से गुजरना होगा.