इटली की मशहूर फिटनेस ब्रांड Technogym अब भारत में अपनी रणनीति बदल रही है। कंपनी अब सीधे ग्राहकों के बजाय लग्जरी रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के साथ पार्टनरशिप पर जोर दे रही है, ताकि प्रीमियम वेलनेस सेगमेंट में अपनी पैठ बनाई जा सके।
रणनीति में बड़ा बदलाव
Technogym के फाउंडर Nerio Alessandri ने भारतीय बाजार के लिए नई चाल चली है। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में दो दशक पुरानी मौजूदगी के बाद, अब कंपनी का फोकस 'B2B2C' मॉडल पर है। इसके तहत, कंपनी अब अपनी हाई-एंड फिटनेस मशीनों को सीधे आलीशान रेजिडेंशियल टावरों और लग्जरी होटलों के अंदर इंस्टॉल करने की योजना बना रही है।
क्यों भारत है खास?
भारत में इन दिनों 'प्रीमियमाइजेशन' का दौर है, जहां रईस ग्राहक अपनी सेहत और लाइफस्टाइल पर भारी खर्च कर रहे हैं। Technogym इसी डिमांड को भुनाना चाहती है, जिसे अक्सर 'वेलनेस की फरारी' (Ferrari of wellness) कहा जाता है। हालांकि, राह आसान नहीं है। भारत में फिटनेस सेंटर्स का पेनिट्रेशन अभी भी 1% से कम है, जो बताता है कि अधिकांश आबादी के लिए इस तरह के महंगे इक्विपमेंट्स अभी भी बजट से बाहर हैं।
रियल एस्टेट का साथ
कंपनी की सफलता अब काफी हद तक भारत के लग्जरी रियल एस्टेट साइकिल पर टिकी है। बिल्डर्स के साथ पार्टनरशिप करके 'वेलनेस इंफ्रास्ट्रक्चर' बनाने से Technogym को सीधे इंडिविजुअल रिटेल सेल के संघर्ष से मुक्ति मिल जाएगी। इसके साथ ही, कंपनी अब केवल इक्विपमेंट सेलर नहीं, बल्कि एक सर्विस और टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर बनने की ओर अग्रसर है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
भारतीय मार्केट में सस्ता सामान बेचने वाले कई प्लेयर्स हैं, लेकिन प्रीमियम सेगमेंट में एंट्री आसान नहीं है। हाई इंपोर्ट ड्यूटी और सर्विसिंग की जरूरत एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। निवेशकों के लिए देखने वाली बात यह होगी कि क्या बिल्डर्स अपने प्रोजेक्ट्स में इन महंगे प्रीमियम एमेनिटीज के लिए बजट आवंटित करना जारी रखेंगे, क्योंकि भारतीय मार्केट काफी ज्यादा प्राइस-सेंसिटिव है। इसके अलावा, सरकारी पॉलिसी और इंपोर्ट ड्यूटी में बदलाव कंपनी के मार्जिन पर सीधा असर डाल सकते हैं।
