Tata Starbucks की वापसी: दो साल बाद आक्रामक विस्तार की तैयारी, अब इन शहरों में बढ़ेंगे कैफे!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Tata Starbucks की वापसी: दो साल बाद आक्रामक विस्तार की तैयारी, अब इन शहरों में बढ़ेंगे कैफे!

Tata Starbucks, जो Tata Consumer Products और Starbucks का जॉइंट वेंचर है, दो साल तक अपने बिजनेस मॉडल को दुरुस्त करने के बाद अब फिर से बड़े पैमाने पर स्टोर खोलने जा रहा है। कंपनी लगातार चार तिमाहियों से बिक्री में ग्रोथ और बेहतर नतीजों के साथ, अब अपने मौजूदा 80 शहरों में स्टोर की सघनता बढ़ाने की रणनीति पर फोकस कर रही है।

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (Tata Consumer Products Ltd.) और स्टारबक्स कॉर्पोरेशन (Starbucks Corporation) के बीच 50:50 का जॉइंट वेंचर, टाटा स्टारबक्स (Tata Starbucks) अब आक्रामक विस्तार की राह पर लौट आया है। कंपनी ने पिछले 18 से 24 महीनों का समय अपने बिजनेस मॉडल को फिर से तैयार करने में लगाया है। इस प्रक्रिया में स्टोर के साइज को एडजस्ट करना, प्राइसिंग स्ट्रेटेजी को बेहतर बनाना और कैपिटल खर्च को कंट्रोल करना शामिल था।

इस सावधानी भरे दौर का असर अब दिख रहा है, क्योंकि कॉफी चेन ने लगातार चार तिमाहियों में समान-स्टोर बिक्री (same-store sales) में ग्रोथ दर्ज की है।

फाइनेंशियल परफॉरमेंस में सुधार और नई रणनीति

रणनीतिक बदलावों का कंपनी के फाइनेंशियल्स पर सकारात्मक असर पड़ा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में, टाटा स्टारबक्स ने ₹1,367 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 7% ज्यादा है। सबसे खास बात यह है कि कंपनी अपने नेट लॉस को ₹100 करोड़ से कम रखने में कामयाब रही, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में रिपोर्ट किए गए ₹135.7 करोड़ के लॉस से काफी बेहतर है। कंपनी का EBITDA और EBIT भी पॉजिटिव हो गया है, जिसका मतलब है कि कंपनी के कोर ऑपरेशंस से कैश जेनरेट हो रहा है, जो नए ग्रोथ के लिए एक मजबूत नींव तैयार कर रहा है।

नई जगहों पर तेजी से जाने के बजाय, कंपनी की मौजूदा विस्तार रणनीति उन 80 शहरों में स्टोर की सघनता बढ़ाने पर केंद्रित है जहां वह पहले से मौजूद है। मैनेजमेंट का कहना है कि एक शहरी क्षेत्र में कैफे की अधिक संख्या होने से ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ती है, सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स आसान होती है और डिलीवरी सेवाएं सुव्यवस्थित होती हैं। इस एप्रोच का मकसद 500 स्टोर के मौजूदा काउंट से आगे बढ़कर, लंबी अवधि में अपने फुटप्रिंट को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना है।

जोखिम और मार्केट का संदर्भ

जहां कंपनी अपना विस्तार कर रही है, वहीं वह भारतीय आउट-ऑफ-होम डाइनिंग मार्केट के बेहद प्रतिस्पर्धी सेगमेंट में काम कर रही है। कैफे सेक्टर में कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू चेन्स के आने से प्राइम रियल एस्टेट और ग्राहकों के लिए लड़ाई तेज हो गई है। इसके अलावा, यह बिजनेस विवेकाधीन खर्चों (discretionary spending) में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। अगर महंगाई का असर कंज्यूमर के वॉलेट पर पड़ता है, तो प्रीमियम कैफे में फुटफॉल पर दबाव पड़ सकता है। कंपनी को तेजी से स्टोर खोलने की लागत को मैनेज करने जैसे सामान्य एग्जीक्यूशन रिस्क का भी सामना करना पड़ता है, साथ ही हाल ही में हासिल की गई प्रॉफिटेबिलिटी को बनाए रखने की कोशिश भी करनी होगी।

निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनी नए स्टोर खोलने की कैपिटल कॉस्ट को मैनेज करते हुए अपनी समान-स्टोर बिक्री ग्रोथ को बनाए रख पाती है या नहीं। कच्चे माल की कीमतों में संभावित अस्थिरता, जैसे दूध और कॉफी बीन्स की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को स्थिर रखने की क्षमता भी बिजनेस के लॉन्ग-टर्म हेल्थ के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.