भारत अब लग्जरी घड़ियों का एक प्रमुख ग्लोबल मार्केट बनता जा रहा है। साल 2026 के शुरुआती नौ महीनों में स्विस घड़ियों का इम्पोर्ट **28.5%** बढ़कर **265 मिलियन स्विस फ्रैंक** तक पहुंच गया है, जिसके चलते ब्रांड्स अब भारत में अपने पैर पसार रहे हैं।
ग्लोबल मार्केट के मुकाबले भारत में तेजी
जहां एक ओर चीन और अमेरिका जैसे पारंपरिक बाजारों में लग्जरी घड़ियों की मांग में क्रमशः 5.9% और 4.1% की गिरावट देखी गई है, वहीं भारत का प्रदर्शन बिल्कुल उलट रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश में हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) की बढ़ती संख्या के कारण अगले साल तक भारत दुनिया के टॉप-8 लग्जरी वॉच मार्केट में जगह बना सकता है।
Franck Muller का बड़ा दांव
अब लग्जरी ब्रांड्स भारत के मिजाज को समझ रहे हैं। Franck Muller जैसे दिग्गज ब्रांड अब ग्लोबल रिटेल मॉडल की जगह भारतीय ग्राहकों की पसंद और सांस्कृतिक प्राथमिकताओं को तवज्जो दे रहे हैं। इसी रणनीति के तहत कंपनी भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में भी एंट्री करने की तैयारी कर रही है। अगले एक महीने में कंपनी एक अल्ट्रा-लग्जरी रेसिडेंशियल प्रोजेक्ट की घोषणा कर सकती है।
निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर
वॉच रिटेल बिजनेस और रियल एस्टेट डेवलपमेंट पूरी तरह अलग चीजें हैं। रियल एस्टेट एक कैपिटल-इंटेंसिव बिजनेस है, जिसमें कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट, रेगुलेटरी चुनौतियां और लंबे समय तक निवेश फंसा रहने का रिस्क होता है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी स्थानीय स्तर पर किन पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करती है और इस प्रोजेक्ट की फंडिंग स्ट्रक्चर क्या होगी।
