Swiggy अब अपने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Instamart पर प्राइवेट लेबल 'Noice' को तेजी से बढ़ा रही है। कंपनी ने मुनाफा बढ़ाने के लिए इन्वेंट्री-लेड मॉडल अपनाया है, लेकिन इस बदलाव के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं।
Swiggy अपनी क्विक कॉमर्स इकाई Instamart में बड़े बदलाव कर रही है। कंपनी अपने प्राइवेट लेबल ब्रांड 'Noice' को और अधिक मजबूती दे रही है, जो अब लगभग 10% कस्टमर ऑर्डर्स में शामिल है। स्वैगी अपने फूड एंटरप्रेन्योर पार्टनर्स की संख्या दोगुनी करने के साथ ही प्रोडक्ट रेंज को 500 से ज्यादा आइटम्स तक ले जाने की योजना बना रही है, जिसमें मुख्य रूप से स्टेपल्स, मसाले और डेयरी प्रोडक्ट्स शामिल हैं।
पार्टनर्स के लिए फाइनेंसिंग का सहारा
इस विस्तार को गति देने के लिए, स्वैगी ने सप्लायर पार्टनर्स के लिए एक खास फाइनेंसिंग प्रोग्राम शुरू किया है। SIDBI, Axis Bank और InCred Finance के साथ साझेदारी कर, कंपनी उद्यमियों को ₹5 करोड़ तक की क्रेडिट लाइन दे रही है। इसका मकसद एक ऐसी सप्लाई चेन तैयार करना है जो क्विक कॉमर्स की बढ़ती जरूरतों को पूरा कर सके।
इन्वेंट्री मॉडल से मार्जिन बढ़ाने की कवायद
यह रणनीति कंपनी के उस बड़े बदलाव का हिस्सा है जिसमें स्वैगी अब इन्वेंट्री-लेड बिजनेस मॉडल की ओर बढ़ रही है। 'इंडियन-ओन्ड एंड कंट्रोल्ड कंपनी' (IOCC) बनने के बाद, स्वैगी अब सीधे अपनी इन्वेंट्री मैनेज कर सकती है। इस बदलाव से ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन में 50 से 70 बेसिस पॉइंट्स के सुधार की उम्मीद है। Blinkit और Zepto की तरह अब स्वैगी भी क्वालिटी और सप्लाई पर बेहतर नियंत्रण रखना चाहती है।
हालांकि, सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि इस मॉडल में काफी अधिक वर्किंग कैपिटल की जरूरत होती है, जिससे कैश फ्लो पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, प्राइवेट लेबल को बढ़ावा देने से बड़े ब्रांड्स के साथ रिश्तों में तनाव भी पैदा हो सकता है। फिलहाल स्वैगी का शेयर लगभग ₹239 के आसपास कारोबार कर रहा है और यह अपने 52-वीक लो के करीब है। ऐसे में बाजार की नजर इस बात पर है कि कंपनी अपने वर्किंग कैपिटल को कैसे मैनेज करती है और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच खुद को कैसे साबित करती है।
