Sula Vineyards ने अपने वाइन टूरिज्म बिजनेस से **₹100 करोड़** का बड़ा आंकड़ा छू लिया है, लेकिन कंपनी के हालिया Q1 FY27 नतीजे निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं। कच्चे माल की बढ़ती लागत और कड़े कॉम्पिटिशन के कारण कंपनी के मुनाफे में भारी गिरावट आई है।
टूरिज्म का दम, पर कोर बिजनेस सुस्त
Sula Vineyards के लिए उनका 'एक्सपीरियंशियल बिजनेस' काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में वाइन टूरिज्म से ₹100 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू हासिल किया है। नासिक में 19 एकड़ में फैले Chandon एस्टेट के अधिग्रहण के बाद, कंपनी अब मिलेनियल ग्राहकों को आकर्षित करने पर जोर दे रही है। सालाना 4,00,000 से ज्यादा पर्यटक इनके एस्टेट्स का दौरा करते हैं।
नतीजों का प्रेशर
पर्यटन की सफलता के उलट, कंपनी के कोर फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर दबाव साफ दिख रहा है। Q1 FY27 में कंपनी का रेवेन्यू करीब ₹112.9 करोड़ रहा, जो साल-दर-साल आधार पर महज 2-3% की बढ़त दिखाता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹1.94 करोड़ से गिरकर महज ₹1.1 करोड़ रह गया है। मैनेजमेंट का कहना है कि अंगूर की ऊंची खरीद लागत और मार्केट में कॉम्पिटिटर्स द्वारा दी जा रही भारी छूट इसकी मुख्य वजह है।
शेयर बाजार की चुनौतियां
स्टॉक के मोर्चे पर निवेशकों का भरोसा फिलहाल डगमगाया हुआ है। पिछले 12 महीनों में Sula Vineyards का शेयर भाव 40% से ज्यादा टूट चुका है। इसके अलावा, कर्नाटक जैसे प्रमुख बाजारों में कमजोर मांग और इम्पोर्टेड वाइन ब्रांड्स से मिल रही कड़ी टक्कर भी कंपनी की राह मुश्किल कर रही है।
रेगुलेटरी अपडेट और भविष्य
जून 2026 में कंपनी को डिविडेंड डिस्क्लोजर नियमों का पालन न करने पर NSE और BSE को ₹11,800 का जुर्माना भी भरना पड़ा था। हालांकि, यह रकम छोटी है, लेकिन निवेशकों के लिए एक सबक है। अब नजरें चौथी तिमाही पर टिकी हैं, जहां मैनेजमेंट को कच्चे माल की लागत सामान्य होने की उम्मीद है। वाइन बिजनेस सीजनल होता है, इसलिए तीसरी तिमाही में बेहतर परफॉर्मेंस की उम्मीद की जा रही है।
