मुनाफे में भारी गिरावट, रेवेन्यू भी लुढ़का
Sula Vineyards ने हालिया तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, और ये नतीजे कंपनी के निवेशकों के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। दिसंबर तिमाही (Q3 FY26) में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 68% लुढ़क कर ₹9.1 करोड़ पर आ गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह प्रॉफिट ₹28.06 करोड़ था।
मांग में कमी और बढ़ती लागतों का डबल अटैक
इस भारी गिरावट की मुख्य वजहें दो हैं: पहला, कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) 10% घटकर ₹196 करोड़ पर पहुँच गया। इसकी वजह कर्नाटक जैसे प्रमुख बाजारों में डिमांड का कमजोर होना है। दूसरा, कंपनी के खर्चों में बढ़ोतरी हुई है। इसमें भारत के नए लेबर कोड्स को लागू करने से जुड़ा ₹1.7 करोड़ का एकमुश्त चार्ज भी शामिल है। इसके अलावा, दुनिया भर में युवा ग्राहकों का रुझान एल्कोहल और मीठे पेय पदार्थों की जगह हेल्दी ज्यूसेस की ओर बढ़ रहा है, जो कंपनी के कोर वाइन बिजनेस के लिए एक स्ट्रक्चरल चुनौती पेश कर रहा है।
वाइन टूरिज्म से मिली कुछ राहत
हालांकि, कंपनी के वाइन टूरिज्म सेगमेंट ने अच्छी परफॉरमेंस दिखाई है। इस सेगमेंट से होने वाली कमाई में 34% की जोरदार बढ़ोतरी हुई है। लेकिन, यह बढ़ोतरी कोर 'ओन-ब्रांड्स' बिजनेस (जो कुल बिक्री का लगभग 90% है) की कमजोरी और बढ़ते खर्चों के प्रभाव को पूरी तरह से पाट नहीं पाई।
शेयर में गिरावट और वैल्यूएशन का गणित
कंपनी के शेयर में भी इस नतीजों के बाद काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। 6 फरवरी 2025 को शेयर करीब ₹349.70 के स्तर पर था, जो 4 फरवरी 2026 तक गिरकर लगभग ₹188.74 पर आ गया। यह गिरावट फरवरी 2025 के दौरान भारतीय शेयर बाजार की कमजोरी के बीच हुई, जब निफ्टी (Nifty) में 5.8% की गिरावट आई थी और FMCG सेक्टर में भी दोहरे अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी।
वैल्यूएशन की बात करें तो, Sula Vineyards का मौजूदा P/E रेशियो लगभग 31x-35x के बीच है। यह घरेलू प्रतिद्वंद्वी United Spirits (P/E ~57x-76x) से काफी कम है, लेकिन ग्लोबल प्लेयर Pernod Ricard (P/E ~11x-12x) से ज्यादा है।
एनालिस्ट्स की राय
इन तिमाही नतीजों के बावजूद, एनालिस्ट्स का Sula Vineyards पर आउटलुक मिले-जुले लेकिन सकारात्मक दिख रहा है। कई रिपोर्ट्स में एनालिस्ट्स की ओर से 'Buy' रेटिंग का सुझाव दिया गया है, और प्राइस टारगेट का औसत ₹256.80 के आसपास है, जो भविष्य में शेयर में उछाल की संभावना जताता है। हालांकि, कुछ टेक्निकल इंडिकेटर्स लॉन्ग-टर्म सेल सिग्नल भी दे रहे हैं।