चीनी के दामों में आए उछाल से भारतीय FMCG कंपनियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सप्लाई कम होने और प्रोडक्शन अनुमान **306 लाख मीट्रिक टन** तक घटने से Britannia, Nestlé और Varun Beverages जैसे दिग्गज शेयरों पर मार्जिन का दबाव दिख रहा है।
भारतीय कंज्यूमर गुड्स सेक्टर के लिए पिछले कुछ महीनों में चीनी के दाम 30-40% तक बढ़ गए हैं। इसकी मुख्य वजह चीनी के प्रोडक्शन में गिरावट है। पहले 343 लाख मीट्रिक टन का अनुमान था, जिसे घटाकर अब 306 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। खराब मौसम और 'रेड रॉट' (Red Rot) जैसी फसलों की बीमारियों ने पैदावार पर गहरा असर डाला है।
मार्जिन पर क्या होगा असर?
Varun Beverages, Nestlé, ITC, Britannia और Dabur जैसी कंपनियों के लिए चीनी एक जरूरी रॉ मटेरियल है। अपने मुनाफे को सुरक्षित रखने के लिए कंपनियां या तो रिटेल दाम बढ़ा रही हैं या फिर 'श्रिंकफ्लेशन' (Shrinkflation) अपना रही हैं, यानी पैकेट का वजन कम कर दिया गया है, लेकिन दाम वही रखा गया है। डर यह है कि त्योहारी सीजन में अगर कीमतें ज्यादा रहीं, तो वॉल्यूम ग्रोथ पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।
सरकार का दखल और सप्लाई चेन
बाजार को स्थिर करने के लिए भारत सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट को मंजूरी दी है। साथ ही, ट्रेडर्स के लिए स्टॉक लिमिट को 200-400 टन और बल्क कंज्यूमर्स के लिए 15 दिन के स्टॉक की सीमा तय की गई है ताकि जमाखोरी पर लगाम लगाई जा सके।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
अगली कुछ तिमाहियों के नतीजे यह तय करेंगे कि कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन कितना दबाव झेल पा रहा है। यदि कमोडिटी के भाव लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं, तो मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है। निवेशकों को मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे बिना बिक्री घटाए इन कॉस्ट को कैसे मैनेज कर रहे हैं।
