Good Food Institute India की नई रिपोर्ट के मुताबिक, **94%** शहरी और संपन्न उपभोक्ता भविष्य में 'Cultivated Meat' (लैब में तैयार मीट) को आज़माने के लिए उत्सुक हैं। हालांकि, इसका बाज़ार में टिकना कीमतों और FSSAI के नियमों पर निर्भर करेगा।
बाजार की बदलती नब्ज
Good Food Institute India (GFI India) की इस रिपोर्ट ने फूड-टेक सेक्टर में एक नई बहस छेड़ दी है। 18 से 44 साल की उम्र के शहरी नॉन-वेजिटेरियन और फ्लेक्सिटेरियन उपभोक्ताओं के बीच इसे लेकर जबरदस्त क्रेज है, खासकर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में।
असली चुनौती: प्राइसिंग और नियम
डिमांड तो दिख रही है, लेकिन असली गेम 'प्राइसिंग' का है। सर्वे के अनुसार, उपभोक्ता पारंपरिक मीट की तुलना में 15% से 20% से ज्यादा प्रीमियम देने को तैयार नहीं हैं। कंपनियों के लिए चुनौती यह है कि वे मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट को कैसे कम करें।
सबसे अहम बात यह है कि इस सेक्टर के लिए फिलहाल भारत में कोई पक्का रेगुलेटरी फ्रेमवर्क नहीं है। FSSAI ने एक साइंटिफिक वर्किंग ग्रुप जरूर बनाया है, लेकिन कमर्शियल सेल के लिए मंजूरी का इंतज़ार है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
सावधान रहें—फिलहाल भारत के शेयर बाजार (NSE या BSE) पर 'Cultivated Meat' बनाने वाली कोई भी लिस्टेड कंपनी मौजूद नहीं है। यह पूरा सेक्टर अभी स्टार्टअप्स और प्राइवेट वेंचर फंडिंग के दौर में है। रिटेल निवेशकों के लिए फिलहाल इसमें सीधे निवेश का कोई रास्ता नहीं है, लेकिन यह भविष्य में ट्रेडिशनल मीट और पैकेज़्ड फूड कंपनियों के लिए बड़ा कॉम्पिटिशन बन सकता है।
ब्रांडिंग का खेल
सर्वे में 85% लोगों ने 'Cultivated Meat' नाम को पसंद किया, जबकि 'Lab-grown' या 'Artificial' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने पर वे पीछे हटते दिखे। भविष्य में इस इंडस्ट्री की कामयाबी इस पर निर्भर करेगी कि वे कितनी कुशलता से अपनी सप्लाई चेन तैयार करती हैं और FSSAI से मंजूरी मिलने में कितना समय लगता है।
