Starbucks अब अपने ड्राइव-थ्रू सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करने जा रही है। कंपनी के CEO ब्रायन निकोल इस तकनीक के जरिए बैकएंड के कामों को ऑटोमेट करना चाहते हैं ताकि स्टाफ का पूरा ध्यान कस्टमर एक्सपीरियंस पर बना रहे।
तकनीक से ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर जोर
Starbucks अपने ऑपरेशनल मॉडल में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। इस नई पहल का मकसद ड्राइव-थ्रू के दौरान ऑर्डर लेने की प्रक्रिया को तेज और सटीक बनाना है। कंपनी ऐसे AI मॉडल्स की टेस्टिंग कर रही है जो बैकग्राउंड में काम करेंगे, जिससे ऑर्डर्स को तुरंत कैप्चर किया जा सकेगा।
क्या है मैनेजमेंट का लक्ष्य?
कंपनी का साफ कहना है कि वे ह्यूमन टच को खत्म नहीं करना चाहते। ऑटोमेशन का मकसद डेटा एंट्री के बोझ को कम करना है, ताकि बारिस्टा (Baristas) का समय बचे और वे ग्राहकों की बेहतर सेवा कर सकें। भविष्य में कंपनी ऐसी तकनीक पर भी काम कर रही है जो ग्राहकों को देखते ही पहचान लेगी, जिससे उन्हें पर्सनलाइज्ड डिजिटल मेन्यू और आसान पेमेंट के ऑप्शन मिल सकेंगे।
निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर
शेयरहोल्डर्स के लिए यह एक 'बैलेंसिंग एक्ट' जैसा है। कंपनी को अपनी प्रीमियम 'थर्ड प्लेस' ब्रांड इमेज और प्रॉफिट मार्जिन के बीच तालमेल बिठाना होगा। पिछले अनुभवों को देखें, तो Burger King जैसी कंपनियों ने AI रोलआउट में चुनौती महसूस की थी, जबकि McDonald’s ने इसमें लेबर कॉस्ट बचाने के फायदे देखे हैं। अब देखना यह है कि क्या Starbucks इन तकनीकी चुनौतियों को पार कर ग्लोबल लेवल पर अपना मार्जिन सुधार पाती है या नहीं।
