Starbucks के खिलाफ सिएटल में एक क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया गया है। आरोप है कि कंपनी ने अपने आठ प्रोटीन ड्रिंक्स को 'शुगर-फ्री' बताकर ग्राहकों को गुमराह किया है, जो अमेरिकी नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
दुनिया की मशहूर कॉफी चेन Starbucks एक बार फिर कानूनी विवादों के घेरे में है। 2 अक्टूबर, 2026 को सिएटल की फेडरल कोर्ट में एक मुकदमा दायर किया गया है, जिसमें कंपनी के आठ खास प्रोटीन-बेस्ड ड्रिंक्स की मार्केटिंग पर सवाल उठाए गए हैं।
आरोपों का आधार क्या है?
शिकायत में कहा गया है कि इन ड्रिंक्स में प्रति वेंटि (venti) सर्विंग 13 से 21 ग्राम तक शुगर है। कानूनी दस्तावेजों के अनुसार, यह शुगर मुख्य रूप से लैक्टोज (दूध में मौजूद प्राकृतिक शुगर) से आती है। अमेरिकी फेडरल मानकों के मुताबिक, किसी उत्पाद को 'शुगर-फ्री' तभी कहा जा सकता है जब उसमें 12-औंस की सर्विंग में 0.5 ग्राम से कम शुगर हो। आरोप है कि कंपनी ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक ग्राहकों को लुभाने के लिए इन गाइडलाइन्स को दरकिनार किया।
निवेशकों के लिए क्या हैं खतरे?
यह विवाद कंपनी के लिए कई स्तरों पर जोखिम पैदा करता है:
- ब्रांड रेपुटेशन: Starbucks जैसे प्रीमियम ब्रांड के लिए ग्राहकों का भरोसा सबसे बड़ी पूंजी है। इस तरह के खुलासे ब्रांड वैल्यू पर बुरा असर डाल सकते हैं।
- वित्तीय प्रभाव: यदि मुकदमा क्लास-सर्टिफिकेशन के चरण तक पहुंचता है, तो कंपनी को भारी कानूनी फीस और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
- ऑपरेशनल चुनौतियां: यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो कंपनी को अपने ड्रिंक्स का फॉर्मूला बदलना पड़ सकता है या पूरी मार्केटिंग रणनीति को दोबारा तैयार करना होगा, जिससे सप्लाई चेन पर असर पड़ना तय है।
रेगुलेटरी स्क्रूटनी की मार
मामला अब FDA (U.S. Food and Drug Administration) जैसे नियामक संस्थानों की नजर में भी आ सकता है। अगर रेगुलेटर्स ने लेबलिंग को लेकर जांच का दायरा बढ़ाया, तो कंपनी पर भविष्य में सख्त अनुपालन की शर्तें और जुर्माने थोपे जा सकते हैं।
फिलहाल, कंपनी ने इस पूरे मामले पर अपनी कोई आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की है। निवेशकों को कंपनी के बयानों और कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।
