विस्तार पर दांव, मुनाफे से दूरी?
Starbucks India, जो Tata Starbucks के नाम से ज्वाइंट वेंचर चलाती है, अपनी बाजार में मौजूदगी को तेजी से बढ़ा रही है। कंपनी नए स्टोर खोलने और मेन्यू में इनोवेशन पर पूरा ध्यान दे रही है। इसमें प्रोटीन युक्त कॉफी ड्रिंक्स और लोकल स्ट्रीट फूड से प्रेरित बन्स जैसे विकल्प शामिल हैं। CEO Sushant Dash का कहना है कि भारत Starbucks के लिए एक अहम ग्लोबल मार्केट है, और इस समय में कंपनी ग्रोथ को तात्कालिक मुनाफे से ऊपर रख रही है। कंपनी का दावा है कि ऑपरेशनल लेवल पर वे पॉजिटिव कैश फ्लो जेनरेट कर रहे हैं।
बढ़ते घाटे के बीच विस्तार की रफ्तार
लेकिन, कंपनी के फाइनेंशियल नतीजे एक अलग कहानी बयां कर रहे हैं। मार्च 2025 में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में, Tata Starbucks को ₹135.7 करोड़ का नेट लॉस हुआ। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर 2024 के ₹82.16 करोड़ के लॉस से काफी ज्यादा है। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू सिर्फ 5% बढ़कर ₹1,277 करोड़ रहा। FY25 में 58 नए आउटलेट खोले गए, जिससे कुल स्टोर्स की संख्या बढ़कर 479 हो गई, जो 80 शहरों में फैले हैं। इसके साथ ही, Starbucks भारत में सबसे बड़े ऑर्गनाइज्ड कैफे चेन में से एक बन गया है। यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय QSR (Quick Service Restaurant) सेक्टर में डिमांड में कमी और कंजम्पशन स्लोडाउन का असर दिख रहा है।
कड़े मुकाबले के बीच रणनीति
भारतीय कॉफी मार्केट में मुकाबला कड़ा है। Starbucks को कई फुर्तीली लोकल कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है। abCoffee जैसी टेक-सेवी चेन अपने किफायती मॉडल से तेजी से आगे बढ़ रही है और उनका लक्ष्य मार्च 2026 तक 1,000 आउटलेट खोलना है। Blue Tokai Coffee Roasters और Third Wave Coffee Roasters जैसे स्पेशियलिटी रोस्टर भी फंड जुटाकर अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं। Coffee Day Enterprises भी एक बड़ा प्लेयर है।
वैल्यूएशन और एनालिस्ट्स की राय
Starbucks Corporation (SBUX) खुद 79x के प्रीमियम P/E (Price-to-Earnings ratio) पर ट्रेड कर रहा है, जो भविष्य की ग्रोथ को लेकर निवेशकों की उम्मीदों को दिखाता है। वहीं, भारतीय पैरेंट कंपनी Tata Consumer Products का P/E भी 71.69 से 78.1 के बीच है, जो दिखाता है कि मार्केट ने इसमें काफी ग्रोथ की उम्मीदें जोड़ी हुई हैं। एनालिस्ट्स Tata Consumer Products के लिए 'Buy' या 'Outperform' रेटिंग दे रहे हैं, लेकिन कुछ का मानना है कि यह ऐतिहासिक तुलना में थोड़ा महंगा (somewhat overvalued) हो सकता है।
मुख्य जोखिम और चुनौतियाँ
Starbucks India के लिए सबसे बड़ा जोखिम यह है कि कंपनी लगातार ग्रोथ को मुनाफे से ऊपर रख रही है। भले ही ऑपरेशनल लेवल पर पॉजिटिव कैश फ्लो हो, लेकिन बढ़ता हुआ नेट लॉस बताता है कि यह मॉडल टिकाऊ नहीं है, जब तक कि रेवेन्यू ग्रोथ खर्चों को पार न कर ले। हर नए स्टोर के लिए भारी निवेश और लोकल कॉम्पिटीशन, खासकर किफायती ऑप्शन देने वालों से, मुनाफे में आना एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, QSR सेक्टर में मौजूदा डिमांड की कमी कंपनी के रेवेन्यू ग्रोथ पर असर डाल सकती है, जिससे हाई फिक्स्ड और वेरिएबल कॉस्ट को मैनेज करना मुश्किल हो जाएगा।
भविष्य की राह: एक रेस अगेंस्ट टाइम?
भारतीय स्पेशियलिटी कॉफी मार्केट में अगले दशक में जबरदस्त ग्रोथ का अनुमान है। यह Starbucks के लिए एक बड़ा मौका है। लेकिन Tata Starbucks को अपनी आक्रामक विस्तार रणनीति को मुनाफेमंद बनाने का रास्ता खोजना होगा। लोकलाइजेशन और हेल्थ ट्रेंड्स पर कंपनी का फोकस सही दिशा में है, लेकिन इसका फाइनेंशियल असर देखना बाकी है। कंपनी के सामने एक नाजुक संतुलन बनाना है: मार्केट शेयर के लिए निवेश जारी रखना और साथ ही बड़े ऑपरेशनल लॉस के बीच मुनाफे का रास्ता खोजना।