Starbucks ने चीन के शिनजियांग में अपने पहले दो स्टोर खोले हैं, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि John Moolenaar ने मानवाधिकार चिंताओं का हवाला देते हुए इन स्टोर्स को बंद करने की मांग की है, जिससे कंपनी के सामने बड़ा भू-राजनीतिक संकट पैदा हो गया है।
विवाद की जड़
चीन के उरुमकी में Starbucks ने अपने दो नए आउटलेट्स खोले हैं, लेकिन यह विस्तार अब एक बड़ी राजनीतिक बहस में बदल गया है। अमेरिकी हाउस सिलेक्ट कमिटी ऑन चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के चेयरमैन, John Moolenaar ने कंपनी को इन आउटलेट्स को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया है। उनका तर्क है कि यह कंपनी की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के दावों के खिलाफ है।
जियोपॉलिटिकल रिस्क और निवेशकों की चिंता
निवेशकों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। पश्चिमी देशों की कंपनियां जब चीन के संवेदनशील क्षेत्रों में कारोबार करती हैं, तो उन पर ग्लोबल स्तर पर ब्रांड ट्रस्ट कम होने का खतरा मंडराने लगता है। शेयरधारकों को डर है कि इस तरह के बढ़ते राजनीतिक तनाव से कंपनी के लिए नियम सख्त हो सकते हैं और भविष्य में स्मूथ ऑपरेशन्स पर असर पड़ सकता है।
नया स्ट्रक्चर: Boyu Capital के साथ पार्टनरशिप
यह विस्तार कंपनी के उस नए बिजनेस मॉडल के बीच हुआ है, जिसे अप्रैल 2026 में अंतिम रूप दिया गया था। इस जॉइंट वेंचर में Boyu Capital की 60% हिस्सेदारी है, जबकि Starbucks के पास 40% शेयर हैं। इस स्ट्रक्चर का मकसद चीन के मार्केट में प्रतिस्पर्धा करना और विस्तार करना था, लेकिन अब यह कंपनी को स्थानीय पार्टनर्स के साथ और ज्यादा गहराई से जोड़ता है, जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक तनाव का केंद्र है।
आगे क्या होगा?
2 अक्टूबर 2026 तक, चीन में राष्ट्रीय अवकाश के कारण कंपनी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी अपने चीन के ग्रोथ स्ट्रेटेजी को अमेरिकी रेगुलेटर्स की बढ़ती सख्ती के साथ कैसे बैलेंस करती है। चीन, Starbucks के लिए एक महत्वपूर्ण मार्केट है, और US-China संबंधों में कोई भी बदलाव कंपनी की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी को प्रभावित कर सकता है।
