Starbucks India: प्रीमियम कॉफी पर बड़ा दांव, पर क्या 'चाय' का राज टूटेगा?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Starbucks India: प्रीमियम कॉफी पर बड़ा दांव, पर क्या 'चाय' का राज टूटेगा?
Overview

Tata Starbucks भारत में अपने प्रीमियम 'Starbucks Reserve' स्टोर्स का तेजी से विस्तार कर रहा है, खासकर बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों में। यह कदम भारत के तेजी से बढ़ते कॉफी मार्केट और बदलते कंज्यूमर ट्रेंड्स का फायदा उठाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, यह विस्तार Starbucks India के लगातार हो रहे ऑपरेटिंग लॉस, भारत में चाय की गहरी पैठ और कंज्यूमर के खर्च में आई सुस्ती के बीच हो रहा है, जो इस दांव को और भी महत्वपूर्ण बना देता है।

प्रीमियम सेगमेंट में Starbucks का 'Reserve' प्लान

Tata Starbucks इस साल बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता में नए 'Starbucks Reserve' आउटलेट खोलने की तैयारी में है। यह एक स्ट्रेटेजिक मूव है जिसका मकसद कॉफी के शौकीनों के लिए एक्सपीरिएंशियल (experiential) फॉर्मेट्स पर फोकस करना है। Tata Starbucks के CEO, Sushant Dash के अनुसार, भारत उनके लिए ग्लोबल मार्केट में सबसे तेजी से बढ़ने वाले देशों में से एक है।

कंपनी देशभर में 500 से ज़्यादा स्टोर्स चला रही है, और उनका लक्ष्य विभिन्न कंज्यूमर्स की जरूरतों को पूरा करना है। 'Reserve' स्टोर्स खास तौर पर कॉफी के प्रति उत्साही लोगों के लिए हैं, जहाँ सिंगल-ओरिजिन (single-origin) और स्मॉल-लॉट (small-lot) कॉफ़ी को अलग-अलग ब्रूइंग तरीकों से पेश किया जाता है। यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब भारत में कॉफी की खपत धीरे-धीरे एक खास मौके से बढ़कर रोज़मर्रा की आदत बनती जा रही है।

हालांकि, भारत में अभी भी कॉफी की पैठ (penetration) लगभग 24-25% है, जबकि चाय 95% घरों में इस्तेमाल होती है। यह दर्शाता है कि कॉफी के लिए काफी संभावनाएं हैं, लेकिन साथ ही यह एक बड़ी सांस्कृतिक चुनौती भी है।

मार्केट की हकीकत और कॉम्पिटिशन

Starbucks Corporation (SBUX) का P/E रेशियो लगभग 79.81 है और मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) करीब $111.45 बिलियन है। दिसंबर 2025 में समाप्त हुई तिमाही में, Starbucks India के रेवेन्यू (revenue) में 7% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ देखी गई और 12 नए स्टोर खोले गए। लेकिन, मार्च 2025 में समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (financial year) में कंपनी के ऑपरेटिंग लॉस (operating losses) लगभग दोगुने होकर $16.5 मिलियन तक पहुँच गए।

2028 तक 1,000 स्टोर्स तक पहुँचने का लक्ष्य, प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) पर विस्तार को प्राथमिकता देने का संकेत देता है। इस आक्रामक ग्रोथ प्लान के बीच कॉम्पिटिटर्स (competitors) भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। Costa Coffee अगले 40-50 नए आउटलेट खोलने की योजना बना रहा है, जबकि Barista और Cafe Coffee Day जैसे डोमेस्टिक प्लेयर्स (domestic players) के साथ-साथ Blue Tokai और Third Wave Coffee जैसे स्पेशियलिटी रोस्टर्स (specialty roasters) भी विस्तार कर रहे हैं।

भारत में ब्रांडेड कॉफी शॉप मार्केट पिछले साल 12.7% बढ़कर 5,339 आउटलेट्स तक पहुँच गया है, जिसमें Tata Starbucks 480 आउटलेट्स के साथ सबसे आगे है।

खर्च में सुस्ती और सांस्कृतिक बाधाएं

भले ही 60% भारतीय अपनी फैमिली स्पेंडिंग (household spending) बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन इनफ्लेशन (inflation) और जॉब सिक्योरिटी (job security) की चिंताओं के चलते नॉन-एसेंशियल (non-essential) आइटम्स पर खर्च करने का इरादा कम हो रहा है। इस तरह की सावधानी प्रीमियम सेगमेंट, जैसे Starbucks Reserve एक्सपीरियंस, को प्रभावित कर सकती है।

इसके अलावा, भारत की गहरी जड़ें जमा चुकी चाय संस्कृति एक बड़ी स्ट्रक्चरल चुनौती है। कई नॉन-कॉफी पीने वालों के लिए चाय ही कॉफी से दूर रहने का मुख्य कारण है। भारतीय कॉफी मार्केट 10.15% की रफ्तार से बढ़ रहा है, लेकिन यह चाय के मुकाबले बहुत छोटा है।

Starbucks India अपने मेन्यू में चाय जैसे लोकल आइटम्स को शामिल करने और वैल्यू-फोक्स्ड (value-focused) ड्रिंक्स पेश करके इस गैप को पाटने की कोशिश कर रहा है। लेकिन, ब्रांड की प्रीमियम पोजिशनिंग (premium positioning) शायद इसे हर किसी तक पहुँचाने में सीमित हो सकती है। कंपनी का पिछला परफॉरमेंस लगातार रेवेन्यू ग्रोथ दिखाता है, लेकिन ऑपरेटिंग लॉस भी बना हुआ है, जो दर्शाता है कि इस प्राइस-सेंसिटिव (price-sensitive) और सांस्कृतिक रूप से भिन्न मार्केट में महत्वपूर्ण मार्केट शेयर कैप्चर करना एक मुश्किल काम है।

आगे की राह

Starbucks की इंटरनेशनल एक्सपेंशन (international expansion) की रफ्तार अमेरिका से तेज़ रहने की उम्मीद है। 2028 तक कंपनी का लक्ष्य नेट रेवेन्यू ग्रोथ और ऑपरेटिंग मार्जिन (operating margins) में सुधार करना है। हालांकि, भारत में प्रीमियम Reserve फॉर्मेट की सफलता काफी हद तक इन चुनौतियों से निपटने पर निर्भर करेगी। ग्लोबल ब्रांड कंसिस्टेंसी (global brand consistency) को लोकल रिक्वायरमेंट्स (local requirements) के साथ बैलेंस करना, खासकर प्राइसिंग और प्रोडक्ट ऑफरिंग में, महत्वपूर्ण होगा।

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