Sony India ने वित्त वर्ष 2026 के नतीजे पेश कर दिए हैं। सुस्त रेवेन्यू के बावजूद कंपनी ने अपने खर्चों पर लगाम लगाकर **₹187 करोड़** का शानदार नेट प्रॉफिट कमाया है।
वित्त वर्ष 2026 (31 मार्च तक) के लिए Sony India के आंकड़े जारी हो गए हैं, जिसमें नेट प्रॉफिट 19% की बढ़ोतरी के साथ ₹187 करोड़ पहुंच गया है। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू ग्रोथ 1% से भी कम रही और यह ₹7,918 करोड़ के स्तर पर ही स्थिर दिखा। यह साफ दर्शाता है कि कंपनी अब सेल्स बढ़ाने के बजाय अपने ऑपरेशनल खर्चों को बेहतर ढंग से मैनेज करने पर जोर दे रही है।
मुनाफे के पीछे का 'कॉस्ट कंट्रोल' फॉर्मूला
मुनाफे में यह उछाल किसी बड़े सेल्स बूस्ट के कारण नहीं, बल्कि इंटरनल एफिशिएंसी के कारण आया है। कंपनी ने अपनी जापानी पेरेंट कंपनी को दिए जाने वाले रॉयल्टी पेमेंट में 6% की कमी की है, जिससे यह खर्च ₹260.26 करोड़ पर आ गया। इसके अलावा, एडवरटाइजिंग और प्रमोशन के खर्च को भी घटाकर ₹182.58 करोड़ कर दिया गया। कुल खर्च ₹7,770.15 करोड़ पर सीमित रखकर कंपनी ने अपने बॉटम लाइन को मजबूत किया है।
रेवेन्यू का बदलता गणित
साल 2015 में Sony India का रेवेन्यू ₹11,000 करोड़ के पार था, जब कंपनी मोबाइल और लैपटॉप मार्केट में काफी एक्टिव थी। उन सेगमेंट से ग्लोबल एग्जिट के बाद रेवेन्यू में उतार-चढ़ाव देखा गया। अब 2022 से कंपनी एक स्थिर लेकिन धीमी विकास दर की ओर बढ़ रही है, जिसमें फोकस पूरी तरह से कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और एंटरटेनमेंट पोर्टफोलियो पर है।
ग्लोबल मार्केट में भारत की नई रेस
फिलहाल Sony के लिए भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा मार्केट है, जबकि जापान, अमेरिका और चीन टॉप-3 में शामिल हैं। मैनेजमेंट का अगला लक्ष्य भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मार्केट बनाना है। भविष्य की राह इसी बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी अपने कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स के जरिए भारतीय बाजार में डिमांड को कितना बढ़ा पाती है और मुनाफे की इस रफ्तार को कैसे बरकरार रखती है।
