Let's Try IPO: 2028 तक ₹2,000 Cr पार करेगी कमाई! कंपनी ने बताई Future Strategy

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AuthorAditya Rao|Published at:
Let's Try IPO: 2028 तक ₹2,000 Cr पार करेगी कमाई! कंपनी ने बताई Future Strategy

भारतीय स्नैक ब्रांड Let's Try ने ₹600 करोड़ का रेवेन्यू रन रेट हासिल कर लिया है। कंपनी का लक्ष्य 2028 में IPO लाने से पहले इसे ₹2,000 करोड़ तक पहुंचाना है।

Detailed Coverage

Let's Try की अब तक की यात्रा

आपको बता दें कि Nitin Kalra द्वारा स्थापित, Let's Try ने महज़ 5 साल में ₹600 करोड़ का सालाना रेवेन्यू रन रेट हासिल कर लिया है। यह कंपनी मास-मार्केट स्नैक्स पर फोकस करती है और रिफाइंड मूंगफली तेल जैसे बेहतर इंग्रेडिएंट्स का इस्तेमाल करती है।

IPO का प्लान और प्रॉफिट का दम

कंपनी का इरादा 2028 तक ₹2,000 करोड़ का रेवेन्यू आंकड़ा पार करने का है, जिसके बाद वह अपना IPO लॉन्च करेगी। खास बात यह है कि Let's Try ने वेंचर-कैपिटल फंड्स पर निर्भर रहने वाली कई स्टार्टअप्स की तरह तेजी के बजाय प्रॉफिट पर ध्यान केंद्रित किया है। कंपनी लॉन्चिंग के समय से ही पॉजिटिव EBITDA बनाए हुए है और फिलहाल 7%-8% EBITDA मार्जिन पर काम कर रही है। इनका लक्ष्य इसे डबल-डिजिट तक ले जाना है। कंपनी की फंडिंग मुख्य रूप से खुद के पैसों और लोन से हुई है, जिससे मैनेजमेंट का कंट्रोल बना रहता है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का रेवेन्यू ₹200 करोड़ था।

कॉम्पिटिशन और मार्केट स्ट्रैटेजी

भारत का स्नैक मार्केट ₹50,000 करोड़ से भी बड़ा है, जहाँ Let's Try को बड़ी FMCG कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है। कंपनी क्वालिटी और अफोर्डेबिलिटी को बैलेंस करने की कोशिश कर रही है। कोरोना काल में ऑनलाइन सेल्स पर फोकस करने के बाद, अब कंपनी ऑफलाइन रिटेल, एयरपोर्ट्स और रेलवे स्टेशनों पर भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।

एक्सपेंशन और भविष्य की योजनाएं

अपने रेवेन्यू टारगेट को पूरा करने के लिए, Let's Try तीन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स चला रही है और बेंगलुरु और मुंबई के पास दो नई यूनिट्स लगाने की योजना बना रही है। कंपनी को उम्मीद है कि 2026-27 के फाइनेंशियल ईयर के अंत तक ₹1,000 करोड़ का रेवेन्यू रन रेट हासिल कर लिया जाएगा। कंपनी फिलहाल इंटरनल कैश जनरेशन पर जोर दे रही है, ताकि IPO से पहले बाहरी फंडिंग की ज़रूरत न पड़े।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

निवेशकों की नज़र इस बात पर रहेगी कि कंपनी अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बनाए रखती है, खासकर ऑफलाइन डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ने पर जहाँ खर्च ज़्यादा हो सकता है। इसके अलावा, बड़ी कंपनियों से मुकाबला करने की क्षमता और नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के सफल संचालन पर भी खास ध्यान दिया जाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.