मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब भारतीय स्मार्टफोन मार्केट पर पड़ रहा है। इस फेस्टिव सीजन में बिक्री में **10%** की गिरावट की आशंका है, क्योंकि ब्रांड्स अब भारी डिस्काउंट के बजाय फाइनेंसिंग स्कीमों पर जोर दे रहे हैं।
चिप्स की किल्लत और मार्केट पर असर
स्मार्टफोन की दुनिया में चिप्स का संकट गहरा गया है। बीते एक साल में मेमोरी चिप्स की कीमतों में 300% का बड़ा इजाफा हुआ है। इसके पीछे मुख्य वजह ग्लोबल चिप सप्लायर्स जैसे SK Hynix, Samsung Electronics और Micron Technology का फोकस AI इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर शिफ्ट होना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सप्लाई-साइड बॉटलनेक साल 2027 या 2028 तक बना रह सकता है।
ब्रांड्स की बदलती रणनीति
कंपोनेंट्स के महंगे होने से Samsung, OnePlus, Realme, Oppo, Vivo और Apple जैसी दिग्गज कंपनियां अब अपनी कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं। खासकर Apple ने iPhone 17 और iPhone 18 Pro सीरीज जैसे मॉडल्स के दाम बढ़ाए हैं। कंपनियों ने प्रॉफिट मार्जिन बचाने के लिए बजट और एंट्री-लेवल स्मार्टफोन्स को मार्केट से कम करना शुरू कर दिया है।
डिस्काउंट नहीं, अब लोन का सहारा
त्योहारी सीजन में मिलने वाले पुराने भारी-भरकम डिस्काउंट्स अब इतिहास बन सकते हैं। इसके बजाय ब्रांड्स 'फाइनेंशियल इंजीनियरिंग' का सहारा ले रहे हैं। अनुमान है कि इस साल लगभग 42% स्मार्टफोन ट्रांजेक्शन क्रेडिट कार्ड EMIs, डेबिट कार्ड इंस्टॉलमेंट्स और NBFC लोंस के जरिए होंगे। ऑफलाइन स्टोर्स पर एक्सचेंज प्रोग्राम्स को भी जोर-शोर से प्रमोट किया जा रहा है ताकि ग्राहकों को लुभाया जा सके।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों के लिए आने वाली तिमाहियों में इन्वेंट्री मैनेजमेंट और प्रॉफिट मार्जिन पर नजर रखना जरूरी होगा। यदि ग्राहकों की डिमांड उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ती है, तो कंपनियों को इन्वेंट्री करेक्शन के दबाव का सामना करना पड़ सकता है, जो शॉर्ट-टर्म फाइनेंशियल परफॉरमेंस को प्रभावित करेगा।
