त्योहारी सीजन के दौरान स्मार्टफोन की बिक्री में **16%** की गिरावट दर्ज की गई है। बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग लागत के कारण कंपनियों ने कीमतों में **40%** तक का इजाफा किया है, जिससे आम खरीदार नए फोन की जगह पुराने फोन को रिपेयर कराने पर जोर दे रहे हैं।
भारतीय स्मार्टफोन बाजार के लिए त्योहारी सीजन की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। नवरात्रि के दौरान स्मार्टफोन की यूनिट सेल्स में साल-दर-साल आधार पर 16% की गिरावट देखी गई है। इस सुस्ती का मुख्य कारण मैन्युफैक्चरिंग लागत में बढ़ोतरी है। मेमोरी चिप्स, लॉजिस्टिक्स और रुपये की गिरती कीमतों के चलते कंपनियों ने स्मार्टफोन की कीमतों को 35% से 40% तक बढ़ा दिया है।
कंपनियों की बदलती रणनीति
Samsung, Apple, Xiaomi, Oppo और Vivo जैसी दिग्गज कंपनियां अब 'वॉल्यूम' के बजाय 'वैल्यू' पर फोकस कर रही हैं। पहले कंपनियां जहां भारी डिस्काउंट देती थीं, वहीं अब मैन्युफैक्चरर इंसेंटिव्स को 40% से घटाकर महज 10% से 25% के दायरे में ला दिया गया है।
बाजार में साफ दिख रही दरार
बाजार दो हिस्सों में बंट गया है। ₹45,000 से महंगे प्रीमियम सेगमेंट में तो फिर भी थोड़ी स्थिरता है, लेकिन एंट्री-लेवल और मिड-रेंज मार्केट पर भारी दबाव है। बजट की कमी के चलते ग्राहक नया फोन खरीदने के बजाय पुराने हैंडसेट को रिपेयर करा रहे हैं या सेकंडरी मार्केट का रुख कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम (Key Risk Factors)
बाजार का 70% से 80% हिस्सा कंज्यूमर फाइनेंसिंग (EMI) पर निर्भर है। यदि कर्ज महंगा होता है या लेंडिंग नॉर्म्स सख्त होते हैं, तो स्मार्टफोन सेक्टर के लिए चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। सितंबर महीने में रिटेल फुटफॉल में भी 20% से 50% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
अब सबकी नजरें कंपनियों के अगले तिमाही नतीजों पर टिकी हैं। क्या कंपनियां कम बिक्री के बावजूद अपने प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रख पाएंगी, यह देखना दिलचस्प होगा। Amazon, Flipkart और JioMart जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स फिलहाल स्टॉक निकालने के लिए प्रोमोशनल ऑफर्स चला रहे हैं, लेकिन दिवाली के बाद कीमतों में और बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
