स्मार्टफोन रिटेलर्स अब नए हैंडसेट्स की जगह रिफर्बिश्ड (Refurbished) डिवाइस मार्केट पर दांव लगा रहे हैं। अगस्त से नए फोन की बिक्री में **30-40%** की गिरावट के बाद, कंपनियां अब सेकंड-हैंड प्रीमियम 5G मॉडल्स के जरिए अपना रेवेन्यू बचाने की कोशिश कर रही हैं।
बाजार का बदलता ट्रेंड
भारत में स्मार्टफोन रिटेलर्स अपने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह से बदल रहे हैं। अगस्त से नए स्मार्टफोन की बिक्री में 30-40% तक की भारी गिरावट देखने को मिली है। महंगी कीमतें और सख्त होते लेंडिंग नॉर्म्स (Lending norms) के कारण आम खरीदार नए फोन लेने से कतरा रहे हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए रिटेलर्स अब सर्टिफाइड सेकंड-हैंड फोन की बिक्री पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।
ग्राहकों की बदलती पसंद
बढ़ती कीमतों और EMI के रिजेक्शन रेट के कारण अब ग्राहकों के लिए नए प्रीमियम फोन खरीदना मुश्किल हो गया है। इसके चलते, वे अब रिफर्बिश्ड प्रीमियम स्मार्टफोन्स की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, ताकि कम कीमत में 5G जैसी एडवांस फीचर्स मिल सकें। यह शिफ्ट बताता है कि अब कंज्यूमर लेटेस्ट मॉडल के बजाय 'वैल्यू-फॉर-मनी' पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।
रिटेलर्स और नई पार्टनरशिप
इस बदलाव को भुनाने के लिए All India Mobile Retailers Association (AIMRA) और Organised Retailers Association (ORA) जैसे ट्रेड बॉडीज ने Cashify जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी की है। इससे अब फिजिकल स्टोर्स पर भी रिफर्बिश्ड फोन आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
बिजनेस पर असर
हालांकि, यह कदम रिटेलर्स को कस्टमर्स को रिटेन करने में मदद करेगा, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी जुड़ी हैं। रिफर्बिश्ड मार्केट के मार्जिन प्रोफाइल्स नए फोन से अलग होते हैं, और रिटेलर्स को अपने ब्रांड की साख बचाने के लिए वारंटी और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर बहुत बारीकी से काम करना होगा। अब देखना यह है कि क्या यह नया रेवेन्यू स्ट्रीम नए हैंडसेट्स की गिरती बिक्री की भरपाई कर पाएगा या नहीं।
