स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ने के बावजूद, लगभग आधे यानी **46%** खरीदार अपने पसंदीदा डिवाइस के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार हैं। यह खुलासा एक हालिया सर्वे में हुआ है। युवा वर्ग जहां खर्च करने को उत्सुक है, वहीं बड़े-बुजुर्ग और बजट-सचेत उपभोक्ता पुराने (refurbished) फोन खरीद रहे हैं या अपग्रेड टाल रहे हैं।
Detailed Coverage
क्यों बढ़ रही है प्रीमियम स्मार्टफोन्स की मांग?
महंगे कंपोनेंट्स के कारण स्मार्टफोन की कीमतें भले ही बढ़ रही हों, लेकिन भारत में इनकी मांग में मजबूती बनी हुई है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 46% कंज्यूमर अपने पसंदीदा स्मार्टफोन के लिए प्रीमियम कीमत चुकाने को तैयार हैं। यह चलन खासकर 25 से 30 साल के युवा ग्राहकों में ज्यादा देखने को मिल रहा है। ये युवा फ्लेक्सिबल पेमेंट प्लान और फाइनेंसिंग ऑप्शन का इस्तेमाल करके हाई-एंड मॉडल खरीद रहे हैं।
कंज्यूमर खर्च की आदतों में बड़ा बदलाव
जहां कुछ ग्राहक प्रीमियम डिवाइसेस पर खर्च करने में संकोच नहीं कर रहे, वहीं बाजार में एक बड़ा विभाजन दिख रहा है। डेटा से पता चलता है कि 29% कंज्यूमर, खासकर 50 साल से ऊपर के लोग, अपने खर्च को सीमित कर रहे हैं। वे या तो रिफर्बिश्ड (refurbished) स्मार्टफोन खरीद रहे हैं या अपने बजट पर सख्ती से टिके हुए हैं। इसके अलावा, सर्वे में शामिल 25% लोगों ने कहा कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो वे अपने मौजूदा फोन की मरम्मत करवाना पसंद करेंगे या नया फोन खरीदना टाल देंगे। यह दिखाता है कि लोग अब इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर सोच-समझकर खर्च कर रहे हैं और वैल्यू को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं।
मार्केट स्ट्रेटेजी और रिटेलर्स का रोल
स्मार्टफोन ब्रांड्स के लिए मौजूदा मार्केट डायनामिक्स में अफोर्डेबिलिटी (affordability) पर जोर देना बहुत जरूरी हो गया है। मैन्युफैक्चरर्स की यह क्षमता कि वे मिड-रेंज से लेकर प्रीमियम सेगमेंट तक की विविध प्रोडक्ट रेंज पेश कर सकें, सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर बन गई है। एनालिस्ट्स का मानना है कि मजबूत ब्रांड वैल्यू वाले ब्रांड्स इस प्राइस हाइक (price hike) से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में हैं, खासकर 2026 के फेस्टिव सीजन को देखते हुए।
रिटेलर्स (Retailers) फाइनल परचेज (purchase) डिसीजन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। चूंकि ग्राहक ऊंची कीमतों को कम करने के लिए डिस्काउंट, एक्सचेंज ऑफर और कम ब्याज वाले फाइनेंसिंग की तलाश में हैं, इसलिए पॉइंट-ऑफ-सेल (point-of-sale) अनुभव अब खरीदारी का मुख्य जरिया बन गया है। इसके अलावा, लोग अपने फोन को ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए कंपनियों के लिए कस्टमर लॉयल्टी (loyalty) बनाए रखने और कॉम्पिटिटिव मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बचाने के लिए बेहतर आफ्टर-सेल्स सपोर्ट (after-sales support) में निवेश करना जरूरी हो गया है।
